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योगी और अयोध्या : भाजपा को अवध क्षेत्र की 82 सीटों और उत्तराखंड में भी माहौल बनाने में मिल सकती है मदद

Thu, 13 Jan 2022 12:49 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

अवध क्षेत्र में विधानसभा की 82 सीटें हैं। योगी के मैदान में उतरने से अयोध्या के आसपास के जिलों अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, बाराबंकी, गोंडा और बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती आदि में तो पार्टी को फायदा होगा ही, साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश में भी अयोध्या से माहौल बनाने में मदद मिल सकती है।
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रामलला के दर्शन करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ाने का फैसला यूं ही नहीं किया गया है। इसके पीछे पूरे चुनाव को हिंदुत्व व सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर केंद्रित करने की रणनीति के संकेत हैं। यही नहीं योगी के अयोध्या से चुनाव लड़ने से न केवल अवध की 82 सीटों बल्कि ब्रज और काशी की भी कई सीटों पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है। यूपी के साथ-साथ उत्तराखंड में भी भाजपा को इसका फायदा मिल सकता है।

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योगी के गोरखपुर, मथुरा और अयोध्या से चुनाव लड़ने की अटकलें पहले से लग रही थीं। बुधवार को दिल्ली में हुई भाजपा कोर कमेटी की बैठक में योगी को अयोध्या से मैदान में उतारने पर लगभग सहमति हो गई है। अयोध्या प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की राजनीति को प्रभावित करता रहा है। ऐसे में भाजपा उन्हें अयोध्या से चुनाव लड़ाकर बड़ा संदेश देना चाहती है। चूंकि सीएम योगी पूरे देश में हिंदुत्व का एक ब्रांड बन चुके हैं इसलिए भाजपा अयोध्या में उनके  चेहरे को आगे करके पूरे प्रदेश के चुनाव को हिंदुत्व के एजेंडे पर केंद्रित करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान समेत कुछ विधायकों के इस्तीफों को देखते हुए भाजपा ने अब योगी को आगे करके कोर हिंदुत्व केमुद्दे पर चुनाव लड़ने का संकेत दे दिया है।

अयोध्या को चुनाव का बड़ा केंद्र बनाने की मंशा
भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो भाजपा में शीर्ष स्तर पर मंथन के बाद यह निष्कर्ष निकला कि सीएम योगी के गोरखपुर से चुनाव लड़ने से उतना फायदा नहीं होगा जितना अयोध्या से लड़ने पर। राम मंदिर निर्माण शुरू हो जाने की वजह से उनके अयोध्या से चुनाव लड़ने पर देश-दुनिया का ध्यान इस तरफ रहेगा। उनके मैदान में उतरने से अयोध्या चुनाव का सबसे बड़ा केंद्र हो जाएगा और पूरा फोकस योगी और अयोध्या पर रहेगा। इसकी एक वजह यह भी है कि अयोध्या में योगी सरकार ने जितनी विकास योजनाएं शुरू की हैं, उसका चुनावी लाभ भी मिल सकता है। उनके यहां से चुनाव लड़ने पर धार्मिक पर्यटन नगरी के रूप में विकसित की जा रही अयोध्या की चर्चा पूरे प्रदेश में रहेगी।
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अवध, यूपी के साथ-साथ उत्तराखंड में भी में मिल सकता है फायदा
अयोध्या अवध क्षेत्र का सबसे प्रमुख केंद्र है। अवध क्षेत्र में विधानसभा की 82 सीटें हैं। योगी के मैदान में उतरने से अयोध्या के आसपास के जिलों अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, बाराबंकी, गोंडा और बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती आदि में तो पार्टी को फायदा होगा ही, साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश में भी अयोध्या से माहौल बनाने में मदद मिल सकती है। यही नहीं योगी केअयोध्या से चुनाव लड़ने का संदेश उत्तराखंड में भी भाजपा को फायदा पहुंचा सकता है। अयोध्या के तमाम संत-महंत भी चाहते हैं कि योगी वहां से चुनाव लड़ें जिससे पूरे प्रदेश में हिंदुत्व की लहर तैयार की जा सके।

भाजपा को वोटों के ध्रुवीकरण में मदद मिलेगी
राजनीतिशास्त्री प्रो. एस.के. द्विवेदी कहते हैं कि योगी अगर अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं तो निश्चित तौर पर हर वर्ग का हिंदू उनके पक्ष में आएगा। आज लोग जाति और संप्रदाय में बंट रहे हैं जिसे मैं सही नहीं मानता हूं, लेकिन चुनाव का वक्त है तो भाजपा को इसका फायदा मिलेगा ही। भाजपा इस समय हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण पर केंद्रित है। हिंदू में मौर्य भी हैं यादव भी, लोध भी और अन्य जातियां भी। वोटों के ध्रुवीकरण का फायदा भाजपा मिलेगा। स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान जैसे लोगों के जाने से कोई फर्क पड़ेगा ऐसा लगता नहीं है। दूसरी तरफ वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल का कहना है कि वहां से चुनाव लड़कर योगी अपने को अयोध्या के  जनप्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं। उनके मैदान में उतरने से अयोध्या की पांच सीटों के अलावा पूर्वांचल के करीब 10 जिलों में भाजपा को फायदा हो सकता है। संभवत: अपनी लोकप्रियता और बढ़ाने के लिए उन्होंने अयोध्या को चुना है। गोरखपुर में उनका असर पहले है। अब वह अपने प्रभाव का विस्तार अवध क्षेत्र तक लाने में सफल रहेंगे।

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