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प्रदेश के अन्य छह शहरों में भी जल्द दौड़ेगी मेट्रो या लाइट मेट्रो: योगी

Fri, 15 Nov 2019 10:25 PM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शहरो में बेहतर परिवहन सेवा मुहैया कराने के उद्देश्य सरकार ने प्रदेश के विभिन्न शहरों में मेट्रो रेल सेवा को बढ़ावा दे रही है। गाजियाबाद, नोएडा व लखनऊ के बाद सरकार ने कानपुर में भी मेट्रो रेल परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, मेरठ, गोरखपुर व झांसी में भी मेट्रो रेल या लाइट मेट्रो (विकल्प केतौर पर मेट्रो की तरह तेज गति से चलने वाली परिवहन सेवा) सेवा शुरू करने का फैसला किया है। 
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मुख्यमंत्री ने कहा कि  इन छह शहरों में भी त्वरित परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के लिए डीपीआर तैयार करने का काम शुरू हो चुका है। शीघ्र ही डीपीआर के आधार पर काम शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह बात शुक्रवार को इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में आयोजित तीन दिवसीय ‘12वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया कॉनक्लेव एंड एक्सपो-2019’ का उद्घाटन करने के बाद प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कही। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी जीवन को बेहतर बनाने में अर्बन मोबिलिटी इंडिया कॉनक्लेव जैसे कार्यक्रम से बहुत मदद मिलेगी। खासकर यूपी के शहरों के विकास के नजरिए से यह आयोजन काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने शहरी परिवहन संसाधनों को बेहतर बनाने पर बल देते हुए कहा कि प्रदेश के 652 नगर निकायों में करीब 23 प्रतिशत आबादी रहती है। उनको बेहतर सुविधाएं मुहैया करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और सरकार प्रयास भी कर रही है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार की योजना के तहत स्मार्ट सिटी के तौर पर देश के 100 शहरों का चयन किया गया है, जिसमें सर्वाधिक छह शहर यूपी के हैं। इनके अलावा जो 7 नगर निगम चयन से वंचित रह गये हैं, उनका विकास भी प्रदेश सरकार खुद के संसाधन से स्मार्ट सिटी के तौर पर कर रही है। नोएडा समेत एनसीआर व प्रदेश के कई शहरों में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में स्मॉग का खतरा मंडरा रहा है। जिससे निजात पाने के लिए प्रदूषण रहित परिवहन की व्यवस्था जरूरी है। 

उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि परिवहन के लिए ऐसी तकनीक विकसित करें जो प्रदूषण रहित और सर्व सुलभ हो। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से ही हमने ई-व्हीकल पॉलिसी लागू की है। सीएनजी व इलेक्ट्रिक बसों को भी बढ़ावा दे रहे हैं। इससे पहले मुख्य सचिव आरके तिवारी ने कहा कि प्रदेश में हर साल व्यक्तिगत वाहनों की संख्या में 10 प्रतिशत का इजाफा हो रहा है। जबकि उसके अनुपात में सड़कों का विकास मात्र 4 प्रतिशत ही है। 

इस वजह से सार्वजनिक वाहनों को बढ़ावा देने पर सरकार ने काम शुरू किया है। मुख्य सचिव ने कहा कि वाहन दुर्घटनाएं करीब 3 प्रतिशत तक जीडीपी को प्रभावित करती हैं। इसके मद्देनजर सरकार की कोशिश हैकि शहरों में रहने वाले लोगों को सुगम व सुरक्षित परिवहन सुविधा मुहैया कराई जाए। इससे पहले मुख्यमंत्री ने ‘स्टैंडर्ड स्पेशिफिकेशंस ऑफ लाइट अर्बन रेल ट्रांजिट सिस्टम मेट्रो लाइट’ पुस्तक का विमोचन किया और मेट्रो रेल सेवा पर विभिन्न प्रदेशों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी देखा। 

इस मौके पर आवास राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव, जर्मनी के राजदूत वॉल्टर जे लिंडनर, केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्र, अपर सचिव के संजय मूर्ति, विश्वबैंक के परिवहन एवं आईसीटी के पूर्व निदेशक जोज लुइस इरिगॉयन, प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।

मेट्रो का किराया राजनीतिक व्यक्ति नहीं, विशेषज्ञ निर्धारित करें: हरदीपपुरी

इस मौके पर मौजूद केन्द्रीय आवासन एवं शहरी मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप पुरी ने कहा कि मेट्रो रेल का इन्फ्रास्ट्रक्चर काफी महंगा होता है। इसलिए मेट्रों जैसी सेवाओं के किराया का निर्धारण करने का अधिकार किसी राजनीतिक व्यक्ति के पास नहीं होना चाहिए। यह काम किसी प्रोफेशन से कराया जाना चाहिए। 

उन्होंने यह बात दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा मेट्रो में मुफ्त यात्रा की घोषणा की ओर इशारा करते हुए कहा। उन्होंने केजरीवाल का नाम लिए बगैर कहा कि ऐसे फैसले सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए जाते हैं। इस तरह के फैसलों से सिर्फ नुकसान होता है। अगर मेट्रो की सेवा को मुफ्त कर देंगे तो मेट्रो का संचालन मुश्किल हो जाएगा। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि मेट्रो सेवा महंगा होने की वजह से सरकार ने मेट्रो लाइट सेवा को विकल्प के रूप में लाया  है। 

उन्होंने कहा कि लखनऊ मेट्रो के पहले चरण का काम तीन साल में पूरा हुआ था लेकिन कानपुर मेट्रो काम अगले दो साल में पूरा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न शहरों में अब तक 680 किलोमीटर मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है। करीब 900 किलोमीटर की मेट्रो सेवा पाइपलाइन में है। 

सड़कें चौड़ी करना नहीं इनके प्रबंधन जरूरी: लुईस इरिगॉयन

विश्व बैंक के सीनियर डायरेक्टर (ट्रांसपोर्ट) जोस लुईस इरिगॉयन का कहना है कि  एशिया के शहरों में 2013 से 2035 के बीच यातायात सुविधाओं की मांग चार गुना तक बढ़ने का आकलन है। इसकी वजह शहरों में 2030 तक 60 प्रतिशत आबादी के रहना शुरू करने की वजह से है। इसकी वजह से महिलाओं की सड़कों पर सुरक्षा जैसी कई शिकायतें सामने आएंगीं। ऐसे में जिम्मेदार संस्थाओं को देखना चाहिए कि सड़कों को चौड़ा करना या फ्लाईओवर बना देना कोई समाधान नहीं है। 

समाधान मौजूदा नेटवर्क के बेहतर प्रबंधन से ही मिलेगा। समाधान मौजूदा सड़कों के अधिकतम बेहतर उपयोग से मिलेगा। एक और तथ्य ध्यान में रखना होगा। शहरों का फैलाव हमेशा महंगा होता है। ऐसा नए ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को विकसित करने की वजह से है। भारत के अहमदाबाद जैसे शहरों से सीखकर सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट विकसित किए जाने चाहिए। 

शहरों में जनसंख्या घनत्व बढ़ाएं। इसके साथ ही यातायात सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विकास किए जाएं। यह भी सच्चाई है कि शहरों में यातायात को बेहतर करने के कई उपाय फेल हुए हैं। नए तरीके अपनाकर इसे सुगम बनाना होगा। विकसित देशों में भी पुराने शहर चुनौती बने। नए यातायात के विकल्प अपनाकर और स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देकर वहां परिस्थितियां ठीक की गईं हैं।
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