लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित हिन्दवी स्वराज्य दिवस समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वामपंथियों पर जमकर निशाना साधा।
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उन्होंने कहा कि वे देश के उदार लोकतांत्रिक मूल्यों का दुरुपयोग कर रहे हैं। उनमें से तमाम लोग एकेडमिक संस्थाओं में बैठकर नक्सलवाद को बढ़ावा दे रहे हैं और देश को तोड़ने की फिराक में हैं।
उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे इस राष्ट्र विरोधी मानसिकता के खिलाफ संघर्ष के लिए आगे आएं। साथ ही कहा कि किसी की उपासना पद्धति बदल जाने से पूर्वज नहीं बदल जाते हैं। छत्रपति शिवाजी महान थे, औरंगजेब नहीं।
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लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, जब मैं कार्यक्रम स्थल की ओर आ रहा था, तो कुछ वामपंथी विचारधारा के लड़के विरोध करते दिखे कि विश्वविद्यालय में हिन्दवी स्वराज्य दिवस क्यों मनाया जा रहा है।
देश के असली इतिहास को खत्म करने का कर रहे षडयंत्र
- फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा, स्वामी विवेकानंद कहा करते थे कि जिस कौम को अपने इतिहास का सही ज्ञान नहीं, वो अपने भूगोल की रक्षा भी नहीं कर सकता।
एकेडमिक संस्थाओं में मौजूद कुछ तत्व इस देश के उदार लोकतांत्रिक मूल्यों का दुरुपयोग कर यहां के असली इतिहास को खत्म करने का षड्यंत्र कर रहे हैं। इतिहास के साथ छेड़छाड़ करना महापाप है।
उन्होंने कम्युनिस्टों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे विदेशी पैसों और ‘झूठन’ को हासिल करके आक्रांताओं को महिमामंडित करने का काम करते हैं। सनातन संस्कृति को नष्ट करने का काम कर रहे हैं। विदेशी आक्रांता उनके आदर्श हैं, इसलिए जनता को उनके बारे में पुनर्विचार करना चाहिए।
विकृत इतिहास लेखन करने वाले इन लोगों ने शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह और महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों को एक सीमित दायरे में कैद करने का काम किया। हमें समझना होगा कि छत्रपति शिवाजी महान थे, न कि औरंगजेब।
अब नहीं होगी इतिहास को विकृत करने की इजाजत
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री ने कहा कि अकादमिक संस्थाओं में मौजूद विकृत मानसिकता वाले इन लोगों (वामपंथियों) के खिलाफ संघर्ष करना होगा। इतिहास को विकृत करने की इजाजत अब किसी को नहीं दी जाएगी।
इनके खिलाफ अकादमिक संस्थाओं के विद्यार्थियों और शिक्षकों को आगे आना ही होगा। उन्होंने केरल के एक कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री का जिक्र करते हुए कहा कि अपने जीवन के आखिरी पड़ाव पर उन्होंने भी माना कि भारत अनेक राष्ट्रीयताओं का समूह नहीं, बल्कि सदैव से एक राष्ट्र रहा है। इसके चलते ही केरल का एक संन्यासी (आदि गुरु शंकराचार्य) देश के अलग-अलग चार कोनों में पीठों की स्थापना कर सका।
योगी ने कहा कि हिन्दु भारतीयता की पहचान है। प्रत्येक भारतीय को हिन्दु होने पर गर्व होना चाहिए। राष्ट्रवाद ही हमारा सिद्धांत है। अंहिसा और सत्य की अवधारणा भारतीय संस्कृति की देन है।
इंडोनेशिया का उदाहरण सामने रखते हुए कहा कि इस्लामिक स्टेट होने के बावजूद वहां के मुस्लिम भी ‘हिन्दु’ नाम रखते हैं। वहां के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष सुकर्णों के परिवार के लोगों के नाम इसका जीता-जागता सुबूत है।
योगी ने कहा कि इंडोनेशिया का आज भी राष्ट्रीय उत्सव रामलीला है, क्योंकि वहां के लोगों ने उपासना पद्धति बदली है, पर अपना पूर्वज भगवान श्रीराम को ही मानते हैं। फिर भारत में जन्मे व्यक्तियों को शिवाजी के शौर्य को याद करने के लिए आयोजित हिन्दवी स्वराज्य दिवस पर एतराज क्यों।
उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले लोगों को अच्छी तरह पता है कि अगर देश के लोगों केअंदर स्वाभिमान जग गया तो उनके नीचे की जमीन खिसक जाएगी।
योगी ने कहा कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने स्वाधीनता आंदोलन का विरोध किया। अंग्रेजों से मिल गए और स्वतंत्र भारत में भी चीन के आक्रमण के समय उसके साथ खड़े हो गए। देशद्रोही तत्व सिर्फ कश्मीर और बस्तर में ही नहीं हैं।
ये लोग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बैठकर नक्सलवाद को प्रश्रय दे रहे हैं। सीएम ने कहा कि शिवाजी ने अपने राज्य के हर व्यक्ति की रक्षा करने का काम किया, पर अफजल जैसे देशद्रोही उनके सामने आए तो उसी की भाषा में उसे जवाब भी दिया।