पुलिस उपाधीक्षक, एसडीएम, तहसीलदार या इनसे ऊपर की रैंक के अधिकारियों के खिलाफ आने वाली भ्रष्टाचार की शिकायत की जांच विजलेंस करती है, जबकि बाकी मामलों में भ्रष्टाचार निवारण संगठन कार्रवाई करता है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने इस साल अब तक 46 मामले रिश्वत खोरी के पकड़े हैं, इनमें पांच पुलिस से संबंधित हैं। 20 मामले अभियोजन स्वीकृति के लिए लंबित हैं।
वहीं, सीबीसीआईडी के लंबित 39 केस में से 21 की अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। सबसे अधिक मामले विजलेंस के हैं, जिनकी अभियोजन स्वीकृति शासन में लंबित है। मुख्यमंत्री ने इन सभी मामलों में वरीयता के आधार पर अभियोजन स्वीकृति देने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार, डीजीपी ओम प्रकाश सिंह, डीजी सीबीसीआईडी वीरेंद्र कुमार, डीजी विजलेंस हितेश चंद्र अवस्थी, डीजी ईओडब्ल्यू आरपी सिंह और डीजी भ्रष्टाचार निवारण संगठन विश्वजीत महापात्रा समेत कई अधिकारी शामिल थे।
वहीं सूत्रों का कहना है कि समीक्षा बैठक के दौरान पटनायक कमेटी की सिफारिशों का भी जिक्र हुआ। कहा गया कि मानव संसाधन से लेकर ट्रेनिंग और अन्य संसाधन मुहैया कराने के साथ-साथ अभियोजन स्वीकृति के लिए समयावधि का निर्धारण की सिफारिश पटनायक कमेटी ने की है। यह सिफारिशें लागू हुई तो और बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी कानून व्यवस्था पर आज कसेंगे अधिकारियों के पेंच
बुधवार को प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार और डीजीपी ओम प्रकाश सिंह कानून व्यवस्था पर जिलों में तैनात अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग करेंगे। हाल के दिनों में हुई घटनाओं को लेकर इस वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जिलों में तैनात अधिकारियों के पेंच कसे जाएंगे। हाल के दिनों में प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी, बाराबंकी और राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में जघन्य अपराध की घटनाएं हुई हैं।