सीएम ने कहा कि मनरेगा के 260 कामों में से 193 से सामुदायिक और 67 से व्यक्तिगत तौर पर किसानों को लाभान्वित किया जा सकता है। डेढ़ साल पहले तक मनरेगा के धन का सदुपयोग नहीं हो रहा था। इस योजना में ईमानदारी से काम करके गांव, गरीब, किसानों की स्थिति में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है।
योगी ने कहा कि सिंचाई के साधन न होने से प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में किसान एक फसल लेता है। नदियां सूखती जा रही हैं। प्रदेश के 222 ब्लॉक डार्क जोन में आ गए हैं। आजमगढ़, ललितपुर, मिर्जापुर समेत कई जिलों में नदियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में अच्छा काम हुआ है। जागरूकता व इच्छाशक्ति हो तो नदियां पुनर्जीवित हो सकती हैं। पिछली सरकारों में इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया।
ग्राम्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि जीडीपी में 15 फीसदी योगदान कृषि का है लेकिन उत्तर प्रदेश के गठन से बाद से किसानों की स्थिति सुधारने पर ध्यान नहीं दिया गया। पहले किसानों की आत्महत्याएं की खबरें आम थीं। 19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद किसानों के जीवन स्तर में सुधार आया है। मनरेगा से 20 हजार तालाबों के निर्माण का लक्ष्य गया है, इनमें से 9728 तालाबों का निर्माण पूरा हो चुका है। गोमती, आमी, वरुणा समेत कई नदियों को पुनर्जीवित किया गया है।
कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रधानमंत्री ने सात मुख्यमंत्रियों की जो हाई पावर कमेटी बनाई है, उसमें सीएम योगी आदित्यनाथ भी शामिल हैं। प्रदेश की 22.50 करोड़ आबादी में 2.30 करोड़ किसान परिवार हैं। इनमें 2.13 करोड़ यानी 93 फीसदी लघु एवं सीमांत किसान हैं। दो करोड़ खेतिहर मजदूर हैं। इनमें एक करोड़ क्रियाशील मजदूर हैं।