लंबे समय से धूल खा रही इन फाइलों पर अब जल्द निर्णय होगा। इससे भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त अधिकारियों व नेताओं की धड़कनें बढ़ गई हैं। धड़कनें इसलिए भी बढ़ी हैं क्योंकि मुख्यमंत्री ने कार्रवाई की शुरुआत ऊपर से करने के लिए कहा है। यानी समूह क के अधिकारियों पर पहले कार्रवाई होगी।
तीन जिलों के पुलिस कप्तान, एक जोन के एडीजी और पीएसी के एक कमांडेंट को अलग-अलग मामलों में विभिन्न एजेंसियों ने दोषी माना था। इनके अलावा कुछ आईएएस अधिकारी भी अलग-अलग स्थानों पर तैनात हैं।
हालांकि यह तय नहीं है कि इन मामलों में शासन अभियोजन की स्वीकृति देगा ही। क्योंकि इनमें से कई अधिकारियों ने उन पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है जबकि कुछ ने जांच एजेंसी पर ही सवाल उठाए हैं। ऐसे में निर्णय शासन को लेना है कि ऐसी फाइलों का निस्तारण वह किस तरह से करता है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित स्पेशल टास्क फोर्स भ्रष्टाचार, कदाचार, दुराचरण, जालसाजी और टैक्स चोरी के मामलों में की जाने वाली जांचों की समीक्षा कर जरूरी दिशा-निर्देश देगी, ताकि समयबद्घ तरीके से मामलों का निपटारा किया जा सके। स्पेशल टास्क फोर्स की बैठक हर दो माह में होगी। टास्क फोर्स अन्य विभागों में तैनात मुख्य सतर्कता अधिकारियों व सतर्कता अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा करेगी।