मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां सरयू की आरती भी की। कहा कि याद रखना कि दुनिया की सभ्यताएं नदी तट पर ही विकसित हुई हैं लेकिन आज नदी संस्कृति दम तोड़ रही है। गंगा, यमुना, गोमती व सरयू महोत्सव कराने का हमारा तथ्य यही है कि नदी संस्कृति को पुनर्जीवित किया जाए। इसी के तहत अयोध्या में भी सरयू मां की आरती हो, उसका जल स्वच्छ रहे आदि के लिए सरकार ने कार्ययोजना बनाई, और पर्यटन विभाग ने इसे मूर्त रूप दिया।
कहा कि हमारा प्रयास है कि संतों के नेतृत्व में अयोध्या की वैश्विक पहचान मिले तभी राम राज व स्वच्छ व सुंदर अयोध्या की परिकल्पना साकार होगी। इस मौके पर पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, पूर्व सांसद रामबिलास वेदांती, कथा वाचक प्रेमभूषण दास, राजकुमार दास, रामदास, सुरेश दास, संतोष दास, गिरीश दास, सांसद लल्लू सिंह, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, इंद्र प्रताप तिवारी, रामचंद्र यादव, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, भाजपा जिलाध्यक्ष अवधेश पांडेय व आंजनेय सेवा समिति के अध्यक्ष शशिकांत दास समेत अन्य मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने वेदांती पर ली चुटकी
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्व सांसद रामबिलास दास वेदांती पर चुटकी लेते हुए कहा कि हमको पता चला था कि वेदांती जी ने समाधि ले ली है, लेकिन आज उन्हें देखा तो चैन आया। यही नहीं महोत्सव के उद्घाटन के दौरान उन्होंने वेदांती जी को अपने बगल बैठाया और काफी देर तक गुफ्तगू भी की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के समग्र विकास की प्राथमिकता गिनाते हुए कहा कि वर्षों तक अयोध्या उपेक्षित रही, अब अयोध्या को पूरी दुनिया देखेगी। वैश्विक पटल पर ऐसा दृश्य हो कि अयोध्या को पूरी दुनिया देखे। थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका जैसे देशों में राम की संस्कृति कायम है। राम के साथ अयोध्या की जो भावना है अन्य देशों को उससे जोड़ने का प्रयास होगा। दीपोत्सव ने अयोध्या को वैश्विक मान्यता दिलाने का काम किया। बहुत सारे लोगों को बुरा लगा जब हमने पुष्पक विमान से राम सीता को उतारा। हम इस तरह के कार्य करते रहेंगे। इस दीपोत्सव को और भव्य बनाया जाएगा। कोरिया के राष्ट्राध्यक्ष को आमंत्रित किया जा रहा है। सांस्कृतिक संबंधों से दुनिया की दूरियां घटाया जा सकता है। 192 देशों में योग परंपरा को वैश्विक मान्यता मिली है इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुंभ को वैश्विक मान्यता मिले इसका प्रयास कभी नहीं किया गया। कुंभ की परंपरा को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में शामिल करने का श्रेय मोदी सरकार को जाता है। कुंभ आज यूनेस्को की धरोहर बन चुकी है। पहले कुंभ की परंपरा को विकृति रूप में पेश किया जाता था, दलित, महिला विरोधी बताया जाता था। 2019 का कुंभ भव्य होगा। देश के 6 लाख गांव, 192 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगें। संस्कृति, अध्यात्म का अद्भुत संगम होगा। सनातन हिंदु धर्म की तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास होगा।