उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने शुक्रवार को दोबारा सत्ता संभाल ली। यह सरकार साढ़े तीन दशक बाद लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी के नजरिए से ही अलग नहीं है बल्कि यह सरकार नए मंत्रियों के चयन, कद्दावर पुराने मंत्रियों की छंटनी और नई सरकार के लिए बड़े लक्ष्यों का एलान के लिहाज से भी अलग है। इन लक्ष्यों के आधार पर ही इस सरकार का आगे आकलन होगा।
योगी 1.0 वरिष्ठ व युवा चेहरों के सरकार में समन्वित भागीदारी की कोशिश तक सीमित थी। काम की कसौटी पर कुछ ही खरे साबित हुए। बड़े कद व अहम विभाग वाले कई मंत्रियों का कोई आउटपुट नजर नहीं आया तो कई की अनुभवहीनता ही पूरे समय नजर आई। कई अपने आचार-व्यवहार से सरकार की मुश्किलें बढ़ाते रहे। तो कई मंत्री बनने के बाद अपनी छवि चमकाने पर ही ज्यादा ध्यान दे रहे थे। इसके लिए संगठन व नेतृत्व को नजरंदाज तक कर रहे थे। नतीजा ये हुआ कि कुछ की संगठन ने विधानसभा चुनाव में टिकट के समय विदाई की। कई किसी वजह से टिकट पाए तो जनता ने विदाई कर दी। कुछ बेहतर समीकरण व लहर की वजह से जीत गए तो उन्हें नई सरकार में मौका न देकर बड़ा संदेश दिया गया है।
योगी की नई कैबिनेट कड़ी सर्जरी के बाद तैयार की गई है। इसके गठन में पिछले पांच वर्ष के कामकाज के अनुभवों के आधार पर कमियों को दूर करने के साथ हर समीकरण को साधने की कोशिश नजर आ रही है। नई कैबिनेट में सूर्य प्रताप शाही, सुरेश खन्ना, धर्मपाल सिंह व लक्ष्मी नारायण चौधरी जैसे वरिष्ठ सदस्यों के अनुभव को महत्व दिया गया है, तो नए व युवा चेहरों के चयन में रिजल्ट के नजरिए को ध्यान में रखा गया है।
बेबीरानी मौर्य पूर्व राज्यपाल रही हैं तो प्रधानमंत्री कार्यालय सहित कई मंत्रालयों में कामकाज का अनुभव रखने वाले नौकरशाह से राजनीतिज्ञ बने एके शर्मा को नई कैबिनेट का हिस्सा बनाया गया है। इसी तरह एडीजी स्तर के आईपीएस अधिकारी से राजनीतिज्ञ बने असीम अरुण को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। सहयोगी दलों में अपना दल (एस) से आशीष पटेल भी मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं। आशीष इंजीनियर हैं।
उप मुख्यमंत्री चयन में सामाजिक समीकरण मजबूत करने पर जोर
पिछली सरकार में भी दो उप मुख्यमंत्री थे। प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के बड़े चेहरे के रूप में स्थापित केशव प्रसाद मौर्य का महत्व बनाए रखा गया है। केशव चुनाव हारने के बावजूद दोबारा उप मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। इसी तरह ब्राह्मण समाज से योगी 1.0 में उप मुख्यमंत्री के पद पर रहे डॉ. दिनेश शर्मा की जगह समय-समय पर मुखर होकर बात करने वाले ब्रजेश पाठक को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उभारा गया है। योगी 1.0 में ब्राह्मणों से जुड़े मुद्दे पर जब भी डैमेज कंट्रोल की नौबत आई, सरकार व संगठन ने पाठक को आगे कर भरपूर उपयोग किया था।
लक्ष्य के नजरिए से भी अलग
मुख्यमंत्री योगी ने विधानमंडल दल के चयन के बाद अपने दूसरे कार्यकाल के लिए कठिन लक्ष्य का एलान किया है। उन्होंने कहा है कि पहले कार्यकाल में कुशासन से सुशासन स्थापित करने के लिए प्रतिस्पर्धा थी। अब सुशासन को मजबूत करने की प्रतिस्पर्धा होगी। वास्तव में यह बेहद कठिन लक्ष्य है। इसके लिए पूरी सरकार व शासन को टीम भावना के साथ गवर्नेंस से कानून-व्यवस्था तक के मोर्चे पर मिलकर काम करना होगा। मंत्रिमंडल के गठन में इस पर ध्यान दिए जाने की कोशिश नजर आ रही है।