लखनऊ। नवरात्र के पहले दिन बृहस्पतिवार को मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री के पूजन के साथ कलश स्थापना होगी। मां को गाय के घी या दूध से बनी खीर का भोग लगाया जाएगा। मां शैलपुत्री की पूजा जीवन में स्थिरता, दृढ़ता और सुख-शांति लाती है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, नवरात्र में नवार्णमंत्र की साधना और दुर्गा सप्तशती का पाठ बहुत फलदायी है। प्रथम दिन गो घृत अर्पित करने से आरोग्य की प्राप्ति, दूसरे दिन शक्कर से दीघार्यु की प्राप्ति, तीसरे दिन दूध से दुखों की निवृत्ति, चौथे दिन मां को मालपुआ अर्पित करने से निर्णय शक्ति का विकास होता है। पांचवें दिन केला चढ़ाने से बुद्धि का विकास, छठे दिन मधु अर्पित करने से आकर्षण व सुंदरता बढ़ती है। सप्तमी पर गुड़ चढ़ाने से शोकमुक्ति और विपत्तियों से रक्षा होती है। अष्ठमी को नारियल चढ़ाने से हर प्रकार की पीड़ा का शमन, नवमी पर धान अर्पित करने से लोक परलोक का सुख प्राप्त होता है।