लखनऊ से दिल्ली को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-24 पर अगले महीने से काम शुरू होगा। नौ साल से फंसे इस प्रोजेक्ट को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हरी झंडी दे दी है। 800 करोड़ रुपये की लागत से सीतापुर और बरेली के बीच 157 किलोमीटर लंबी रोड को एक ही पैकेज में बनाने के लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। चूंकि वर्तमान में यह सड़क वाहनों के चलने लायक नहीं है, इसलिए सबसे पहले इसे मोटर चलने लायक बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
एनएच-24 को बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) मोड में फोरलेन करने के लिए वर्ष 2010 में टेंडर किए गए थे। सीतापुर से बरेली के बीच फॉरेस्ट और प्रदेश सरकार की एनओसी न मिलने से प्रोजेक्ट अटक गया, जबकि लखनऊ से सीतापुर और बरेली से दिल्ली के बीच निर्माण काफी पहले पूरा हो चुका है।
सीतापुर से बरेली के बीच कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली कंपनी एरा इन्फ्रा को एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल) के दिवालिया घोषित होने से यह प्रोजेक्ट फंस गया था। एरा को बैंक से मिलने वाली मदद पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। नतीजतन, एनएचएआई को अप्रैल 2019 में पूरा अनुबंध रद्द करना पड़ा।
लखनऊ से सीतापुर, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर और मुरादाबाद और अमरोहा होते हुए दिल्ली को जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग है। यात्रियों के अलावा माल की आवाजाही भी इस मार्ग से खूब होती है। 510 किलोमीटर लंबी इस सड़क का 157 किलोमीटर हिस्सा मरम्मत के अभाव में वाहनों के चलने लायक नहीं है। इस रोड से व्यापारियों के लिए ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट काफी ज्यादा हो गई है और आए दिन हादसे होते रहते हैं। इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।