लखनऊ। सहालग के भारी सीजन में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की किल्लत के कारण जब गैस के चूल्हे ठंडे पड़ने लगे, तो लकड़ी की भट्ठियों और छोटे रिफिलिंग सिलिंडरों ने इज्जत बचा ली। बुधवार को राजधानी की करीब 1200 शादियां इसी वैकल्पिक व्यवस्था के भरोसे संपन्न हुईं।
टेंट कैटरिंग एंड डेकोरेटर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि किचन में जहां लकड़ी की भट्ठियों पर मुख्य भोजन पका, वहीं चाट, डोसा और अन्य स्नैक्स काउंटरों के लिए 5-5 किलो वाले छोटे रिफिलिंग सिलिंडरों का इस्तेमाल किया गया। रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों ने भी अपने छोटे सिलिंडर मुहैया कराकर इस संकट की घड़ी में कैटरर्स की मदद की।
उत्तर प्रदेश आदर्श टेंट, कैटरिंग एंड डेकोरेशन व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव गुप्ता ने बताया कि संकट के इस दौर में मेजबानों (शादी वाले घरों) ने भी पूरा सहयोग किया। उन्होंने काम में कमियां निकालने के बजाय समय पर खाना तैयार होने को प्राथमिकता दी, जिससे बड़े विवाद टल गए।
1200 शादियां निपटीं, अब 1500 पर नजर
कैटरिंग कारोबारियों ने बताया कि बुधवार की 1200 शादियां तो जैसे-तैसे निपट गईं, लेकिन अगले दो-तीन दिनों में शहर में करीब 1500 शादियां हैं। अचानक मांग बढ़ने से अब लकड़ी के दाम भी बढ़ने की आशंका है। हर पार्टी वैकल्पिक ईंधन की ओर भाग रही है, जिससे वैकल्पिक बाजार में भी भीड़ और महंगाई बढ़ती दिख रही है।
गैस के लिए परेशान लोग।
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