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सड़क पर गड्ढे में बाइक जाने से गिरी नवविवाहिता, पीछे आ रहे ट्रक ने रौंदा

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ट्रांसपोर्टनगर की व्यस्ततम सड़क जिसपर वाहनों का रेला होता है। वीवीआईपी का मूवमेंट होता है। उसी सड़क पर मेट्रो स्टेशन के पास जिस गड्ढे को जिम्मेदार अनदेखा करते रहे, उसने एक ‘जिंदगी पर ब्रेेक’ लगा दिया।
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पति सनी मानक के साथ शिवांगी (32) बाइक से मायके जा रही थी। पानी भरे गड्ढे में बाइक जाते ही शिवांगी उछलकर गिर पड़ी।
संभलने का मौका भी नहीं मिला कि पीछे से आ रही तेज रफ्तार ट्रक ने उसे रौंद दिया। शिवांगी की मौत होते ही खून को मिट्टी से ढंक दिया गया।
खून के दाग को तो छिपा दिया गया, पर सनी को जिंदगी भर का जो जख्म मिला वह कैसे भरेगा? उसका जिम्मेदार कौन है?
सरोजनीनगर के पिपरसंड गांव निवासी सनी चौक स्थित एक निजी बैंक में सेल्स मैनेजर हैं। अभी दो महीने पहले ही उनका विवाह आशियाना के सेक्टर-एम की निवासी शिवांगी से हुआ था।
रविवार दोपहर शिवांगी पति सनी के साथ बाइक से मायके जा रही थी। पर, मेट्रो स्टेशन से करीब 50 मीटर पहले हुए गड्ढे ने उसके मायके के सफर को जिंदगी का अंतिम सफर बना दिया।
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सनी जो कुछ देर पहले घर से हंसते-मुस्कुराते ससुराल के लिए निकला था, खून से सनी पत्नी को देख बदहवास हो गया। हादसा होते ही मौके पर भीड़ जमा हो गई।
इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ने बताया कि कुछ दूर पर मौजूद पुलिस ने हादसा करके भागे ट्रक का पीछा करके शहीद पथ से पकड़ा और चालक को हिरासत में लिया।
मां अपनी लाडली का इंतजार ही करती रह गई
शिवांगी की मां नीलम साहनी जो बेटी-दामाद के स्वागत की तैयारियों में जुटी थीं, बेटी की मौत की खबर आते ही गश खाकर गिर पड़ीं। घर में जो रौनक छाया था, वह मातम में बदल गया।...तो नई-नवेली बहू की मौत से सनी के घर भी कोहराम मच गया। ससुर सत्यपाल मानक व सास कमलेश साहनी रो-रोकर बेहाल हैं।
ऐसी लापरवाही....
वीवीवीआईपी का आना-जाना होता है तो गड्ढों में डाल देते हैं बजरी, बारिश होते ही खुल जाती है पैबंद
हादसा स्थल से कुछ दूरी पर ही अमौसी एयरपोर्ट है। जहां वीवीआईपी का आए दिन आना-जाना होता है। फिर भी जगह-जगह सड़क पर हो चले गड्ढों को नहीं पाटा गया। ट्रांसपोर्टनगर ही नहीं, आसपास भी थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कई गहरे गड्ढे हैं। घटनास्थल के पास दुकान में काम करने वाले बदाली खेड़ा निवासी संजय बताते हैं कि जिस गड्ढे की वजह से शिवांगी की मौत हुई, उससे अक्सर लोग चोटिल होते रहते थे। मेट्रो स्टेशन के पास नाला चोक होने से पानी बहकर इस गड्ढे में भरा रहता जो इसे और खतरनाक बना देता। स्थानीय लोगों का कहना है कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान बजरी या डस्ट डालकर इन्हें भर दिया जाता है। एक-दो दिन मेें ही ये पैबंद हट जाता है।
हादसे-दर-हादसे...आखिर कब चेतेंगे
हरदोई रोड पर काकोरी में दशहरी गांव के सामने एक अगस्त को गड्ढे में बाइक पलटने से सत्यम शुक्ल (20) की मौत हो गई थी। जबकि उसके दोस्त सत्यम व नितिन गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 19 अगस्त 2018 को भी ऐसा ही एक हादसा हुआ था। गोमतीनगर से एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 की तरफ जा रहे देव मंगल शाही (35) सरोजनीनगर इलाके में हाईवे पर गड्ढे में बाइक जाने से उछलकर गिर पड़े थे और उन्हें पीछे आ रही ट्रैक्टर-ट्रॉली ने रौंद दिया था। हादसे में देव की मौके पर ही मौत हो गई थी।
जिंदगी पर ब्रेक लगातीं सड़कें
सड़कें विकास को रफ्तार देती हैं। तरक्की के साथ खुशहाली लाती हैं। पर सड़कों के गड्ढे जिंदगी पर ही ब्रेक लगा देते हैं। यही वह गड्ढा है जिसने शिवांगी के मायके के सफर को अंतिम सफर बना दिया।
खून तो छिप गया...पर जख्म देने वाली सड़क?
शिवांगी की मौत के बाद गड्ढे में बिखरे खून पर मिट्टी डाल दी गई। खून तो छिप गया। सड़क से हादसे का निशान मिट गया। पर, सवाल यही है कि जख्म देने वाली सड़क के गड्ढे कब भरे जाएंगे?
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