महिला कल्याण विभाग अब गरीबी की परिभाषा बदलने जा रहा है। अभी तक 33 रुपये प्रति दिन कमाने वाले को विभाग गरीब नहीं मानता है।
इस कारण उसे महिला एवं बाल विकास विभाग की ‘स्पांसरशिप’ व ‘फोस्टर केयर’ योजना से वंचित होने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
विभाग ने लालन पोषण व देखभाल योजना में 12 हजार रुपये सालाना तक आय वाले परिवारों को ही इसका लाभ देने की शर्त लगाई है। अब इस योजना के तहत लाभार्थियों की सालाना आय में वृद्घि करने की तैयारी है।
यह गड़बड़ी इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम (आईसीपीएस) के तहत प्रदेश सरकार द्वारा केंद्र की शर्तें मानने के कारण हुई है।
हाल ही में शुरू हुई ‘स्पांसरशिप’ व ‘फोस्टर केयर’ योजना में प्रदेश सरकार ने 12 हजार सालाना से कम यानी प्रतिदिन 33 रुपये से कम कमाने वाले को ही इसका लाभ देने का निर्णय किया था।
इसमें बाल गृह व बालिका निकेतन में रह रहे गरीब परिवारों के 18 वर्ष तक के बच्चों को उनके घर भेजने के लिए सरकार आर्थिक मदद देनी है।
इस योजना में गरीब परिवारों के बच्चों को 500 रुपये व अधिकतम दो बच्चों के लिए एक हजार रुपये महीना दिया जाना है। सरकार यह मदद तीन साल तक लगातार देगी।
सरकार की इस गड़बड़ी को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उठाया था। इसी के बाद से इसमें बदलाव की तैयारी चल रही है। अब महिला कल्याण विभाग शहरी व ग्रामीण दोनों के लिए अलग-अलग आय के मानक तय कर रहा है।
शहरी क्षेत्र में 25,546 रुपये व ग्रामीण क्षेत्र में 19,884 रुपये तक आय वाले परिवारों को इसका लाभ देने की योजना है। इसे केंद्र सरकार के पास भेज दिया गया है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इसमें संशोधन किया जाएगा।