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बिना पद के ही लिपिकों को दिया प्रमोशन, अब जांच दबाने की कोशिश

Fri, 30 Nov 2018 07:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रमोशन - फोटो : amar ujala
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय में बिना नियमावली व पद के ही लिपिकों को प्रमोशन देने की शिकायतों की जांच को दबाने का खेल शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर इस मामले में स्पेशल ऑटिड कराने का फैसला हुआ था, लेकिन निदेशालय स्तर पर इसे दबाने का प्रयास हो रहा है।

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दो बार पत्र लिखने के बाद भी निदेशालय ने आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय को जरूरी सूचनाएं अब तक नहीं उपलब्ध कराई हैं। कई वर्षों से जमे बाबू ऑडिट निदेशालय का पत्र दबाए बैठे हैं।

बता दें कि पिछले साल विभागीय सेवा नियमावली को ताक पर रख लिपिक संवर्ग के कुल 848 पदों का सृजन कर इन पर प्रमोशन दिए गए थे। इनमें प्रधान सहायक के 641, अपर सांख्यिकीय अधिकारी के 157 व प्रशासनिक अधिकारी के 56 पद शामिल हैं।
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गौरतलब है, इतने अधिक पद सृजित करने के लिए न तो लिपिकीय सेवा नियमावली में संशोधन कराया गया और न ही कैबिनेट से मंजूरी ली गई। मनमाने तरीके से चहेतों को दिए गए प्रमोशन से हर महीने सरकारी खजाने से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

यह खेल तब सामने आया जब महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ केअध्यक्ष गिरीश पांडेय ने मुख्यमंत्री के यहां शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत पर स्पेशल आॉडिट कराने का निर्देश दिया गया। विशेष सचिव वित्त ने निदेशक आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा को पूरे मामले का स्पेशल ऑडिट करने को कहा था। 

इसी कड़ी में निदेशक आंतरिक लेखा ने बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय से गिरीश पांडेय के शिकायती पत्र के सभी बिंदुओं पर सूचना मांगी थी।  निदेशक ने दो पत्र भेजे। पहला पत्र 20 जून को और दूसरा 16 अगस्त को भेजा लेकिन बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय ने अब तक सूचना नहीं दी। इससे साफ है कि मामले को दबाने की कोशिश चल रही है।

इन प्रमुख बिंदुओं पर होना है स्पेशल ऑडिट

  • सेवा अवधि पूरा हुए बिना लिपिकों को एसीपी देना
  • प्रोन्नति के पद को ही मूल पद मानकर बार-बार एसीपी का लाभ देना
  • बिना नियमावली पद सृजित करना व वेतन भुगतान
  • नियमों का उल्लंघन कर प्रशासनिक अधिकारी व प्रधान सहायक के पद पर प्रोन्नति देना
 नियमावली में है इन पदों का प्रावधान
 ‘बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार लिपिक सेवा नियमावली-1992’ में लिपिक संवर्ग में सिर्फ वरिष्ठ लिपिक, कनिष्ठ लिपिक और संगणक या सहायक सांख्यिकीय अधिकारी की श्रेणी निर्धारित की गई है। जबकि पिछले दो साल से विभाग में अपर सांख्यिकीय अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी जैसे पदों पर प्रमोशन दिया जा रहा है। साथ ही उन्हें एश्योर्ड कॅरिअर प्रमोशन (एसीपी) देते हुए ग्रेड पे और वेतन बैंड बढ़ाने की शिकायत की गई है।
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केंद्र सरकार जता चुकी है आपत्ति

चूंकि प्रदेश में चल रहे इंटीग्रेटेड चाइल्ड डवलपमेंट सर्विसेज (आईसीडीएस) पर खर्च होने वाली धनराशि का 75 प्रतिशत हिस्सा  केंद्र सरकार देती है। इसलिए उसने भी अनधिकृत तरीके से सृजित पदों पर तैनात लिपिकों को वेतन देने पर आपत्ति जताई थी। केंद्र सरकार में भी आईसीडीएस के लिपिकीय संवर्ग में यूडीसी, एलडीसी व सांख्यिकीय अधिकारी केपद का ही प्रावधान है। प्रशासनिक व अपर सांख्यिकीय अधिकारी नाम का कोई पद स्वीकृत नहीं है।
 
निदेशक आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा ने जो सूचना मांगी है, उसका परीक्षण करवा रहा हूं। अपेक्षित सूचनाएं जल्द भेज दी जाएंगी। 
- शत्रुघ्न सिंह, निदेशक, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार
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