लखनऊ। केजीएमयू में पकड़े गए इंटर पास फर्जी डॉक्टर के मामले में अब जांच एजेंसियों को लारी कार्डियोलॉजी विभाग से डीएम कर चुके एक डॉक्टर के तार जुड़े मिले हैं। इस डॉक्टर की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, जिससे जांच का दायरा बढ़ गया है।
शुरुआती जांच में यह मामला केवल फर्जी डिग्री और पहचान के सहारे मरीजों के इलाज तक सीमित था। अब सामने आए तथ्यों से यह एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। आशंका है कि यह डॉक्टर कार्डियो सेवा फाउंडेशन नेटवर्क को सक्रिय रखने में अहम भूमिका निभाता था। वह फाउंडेशन में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत था।
संबंधित डॉक्टर लंबे समय तक केजीएमयू परिसर से जुड़ा भी रहा है। उसके कई संपर्क संस्थान के भीतर और बाहर दोनों जगह सक्रिय रहे हैं। जांच टीम अब उसके पुराने रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, सोशल नेटवर्क, पेशेवर गतिविधि की बारीकी से जांच कर रही है। फाउंडेशन से उसके जुड़ने के तरीकों की भी जांच की जा रही है। केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी साक्ष्यों की गहनता से जांच की जाएगी। यह प्रकरण एक बड़े चिकित्सा धोखाधड़ी नेटवर्क का खुलासा कर सकता है।
आंतरिक जांच और नेटवर्क का विस्तार
केजीएमयू प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक स्तर पर जांच शुरू कर दी है। कैंपस से जुड़े सभी संदिग्ध लिंक और पुराने रजिस्ट्रेशन की समीक्षा की जा रही है। अकादमिक रिकॉर्ड की भी गहनता से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि संस्थान की प्रक्रियाओं में कोई लापरवाही तो नहीं हुई। ऐसी लापरवाही का फायदा उठाकर फर्जी डॉक्टर सक्रिय हो सकते थे।