राजनाथ सिंह और रीता बहुगुणा जोशी के बीच चुनावी संयोग बन रहे हैं। हालांकि संयोगों का नतीजों से कोई संबंध नहीं होता।
फिर भी भाजपाई व कांग्रेसी इन संयोगों से अपने-अपने पक्ष की संभावनाएं तलाशने में जुटे हैं। सिंह ऐसे दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री हैं जो लखनऊ से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।
लखनऊ के चुनावी इतिहास में राजनाथ से पहले सिर्फ एक ही पूर्व मुख्यमंत्री लखनऊ संसदीय सीट से चुनाव लड़े और वह थे रीता बहुगुणा जोशी के पिता हेमवती नंदन बहुगुणा। बहुगुणा 1977 में चुनाव लड़े थे।
इसलिए चुनाव में भले ही राजनाथ व रीता अलग-अलग पाले में खड़े हों लेकिन चुनावी इतिहास में सिंह और बहुगुणा का नाम एक साथ ही दर्ज होगा।
जब-जब लखनऊ की चर्चा होगी तो उसमें यह बात जरूर आएगी कि बहुगुणा के बाद दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ लखनऊ लोकसभा से चुनाव लड़े।
दिलचस्प है 'र' का अद्भुत संयोग
संयोग यह भी दिलचस्प है कि राजनाथ सिंह पूर्व मुख्यमंत्री हैं तो उनके मुकाबिल जोशी के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी हैं।
यही नहीं, सिंह इससे पहले जब 1993 में विधानसभा का चुनाव राजधानी की महोना सीट से लड़े थे तो उनके मुख्य मुकाबले में ‘र’ अक्षर से शुरू होने वाले सपा के राजेंद्र यादव थे।
इस बार भी उनके मुकाबले ‘र’ अक्षर से शुरू होने वाले नाम वाली रीता बहुगुणा जोशी हैं।
दोनों का नाम एक ही मतदाता सूची में
संयोगों का खेल यही नहीं खत्म होता। राजनाथ हों या रीता दोनों के नाम एक ही विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज हैं।
रीता भी विधानसभा के मध्य क्षेत्र से मतदाता हैं और राजनाथ भी राजधानी के मध्य क्षेत्र से मतदाता हैं।
दोनों ही लखनऊ के मूल निवासी नहीं हैं। सिंह और जोशी दोनों का नामांकन भी एक ही दिन शनिवार 5 अप्रैल को होने जा रहा है।
संयोग से तलाश रहे संभावनाएं
संयोगों का सिलसिला आगे किस दिशा में बढ़ेगा, यह तो चुनाव नतीजों के बाद पता चलेगा। पर, भाजपाइयों व कांग्रेसियों के बीच इन संयोगों की चर्चा खूब है।
भाजपाइयों को लग रहा है कि जनता लहर में पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में यहां से चुनाव लड़े हेमवती नंदन बहुगुणा की सफलता का इतिहास फिर दोहराएगा और मोदी लहर पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ की राजधानी से प्रतिनिधित्व की इच्छा पूरी कर देगी।
कॉंग्रेसियों को 1993 की याद आ रही है। उनके भीतर भी रीता के संयोग से संभावनाएं जग रही हैं।