प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमल रानी वरुण ने कहा कि इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलीटेक्निक संस्थाओं के छात्रों को अगले वर्ष से 50 से 100 फीसदी तक प्लेसमेंट दिलायी जाएगी। इसके अलावा डिग्री व डिप्लोमा सेक्टर में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार पर खास फोकस किया जा रहा है।
दोनों सेक्टरों से संबंधित सभी राजकीय व अनुदानित संस्थाओं को 2022 तक एनबीएस से मान्यता दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कमल रानी वरुण ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी प्रदेश सरकार के ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के मौके अपनी पहली प्रेसवार्ता में दी।
उन्होंने विभाग की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, बरेली, आगरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, झांसी व गोरखपुर में रीजनल प्लेसमेंट सेंटर और सभी पॉलीटेक्निक में प्लेसमेंट सेंटर की स्थापना की गई है। अगले साल से इन संस्थानों से निकलने वाले छात्रों को 50 से 100 प्रतिशत तक प्लेसमेंट दिलाने का लक्ष्य तय किया गया है। पहले यह आंकड़ा 30 से 40 प्रतिशत था।
मंत्री ने कहा कि प्राविधिक शिक्षा के डिजिटलाइजेशन के लिए कई तरह से प्रयास किए जा रहे हैं। कोशिश है कि सरकारी के अलावा निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों व पॉलीटेक्निक संस्थाओं में ई- लाइब्रेरी समेत सभी सुविधाएं डिजीटल रूप में हों।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रदेश स्तर पर उच्चस्तरीय समिति का गठन भी किया है। इसमें आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम के विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति के सुझाव के आधार पर पाठ्यक्रम में बदलाव भी किया जाएगा।
इस मौके पर मदन मोहन मालवीय प्राविधिक विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलपति एसएन सिंह, एचबीटीयू के कुलपति एनबी सिंह और एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक मौजूद रहे।
प्राविधिक शिक्षकों को जल्द मिलेगा 7वें वेतन का लाभ
कमल रानी ने बताया कि इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलीटेक्निक संस्थाओं के शिक्षकों व कर्मचारियों को जल्द 7वें वेतन आयोग की संस्तुतियों का लाभ मिलेगा। कैबिनेट से मंजूरी के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।
महानिदेशक प्राविधिक शिक्षा के पद पर नियुक्ति जल्द
एक सवाल के जवाब में प्राविधिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही कार्यभार संभाला है। इसलिए वह लंबित मामलों को देख रही हैं। अगर महानिदेशक का पद सृजित होगा तो जल्द ही नियुक्ति कराने का प्रयास करेंगी। बता दें कि यह पद आईएएस संवर्ग के अधिकारी से सृजित किया गया है।