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सपा नेता ने बताया, चुनाव से पहले क्यों बिखरा जनता परिवार

Thu, 03 Sep 2015 10:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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साढ़े चार महीने पहले मुलायम सिंह यादव की अगुवाई में जोर-शोर के साथ बना जनता परिवार का महागठबंधन बिहार चुनाव से ऐन पहले धराशायी हो गया। सीटों के बंटवारे में अनदेखी से नाराज समाजवादी पार्टी ने बृहस्पतिवार को नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव को झटका देते हुए खुद को गठबंधन से अलग कर लिया। सपा ने बिहार चुनाव अपने दम पर लड़ने का फैसला किया है।
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सपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने बृहस्पतिवार को फैसले की जानकारी देते हुए नीतीश-लालू पर सपा को अपमानित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बड़े घटक दलों ने सीटों के बंटवारे पर सपा से कोई बात नहीं की। यह गठबंधन धर्म के अनुकूल नहीं है।

बिहार विधानसभा चुनाव सपा अपने बलबूते पर लड़ेगी। कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना है, यह पार्टी की बिहार इकाई तय करेगी। उन्होंने कहा, गठबंधन के बड़े घटक दलों का फर्ज था कि वे सीटों के बंटवारे पर बातचीत करते। हमें टीवी और मीडिया के जरिये सीटों के बंटवारे की जानकारी मिली। यह सपा के लिए अपमानजनक था।
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अन्य दलों से बातचीत संभव

रामगोपाल ने कहा, दो या पांच सीटों पर चुनाव लड़ने पर न तो सपा नेतृत्व सहमत था और न ही कार्यकर्ता। बिहार की पार्टी इकाई और कार्यकर्ताओं की भावना को देखते हुए सम्मानजनक तरीके से अलग होकर चुनाव लड़ने का फैसला लिया गया। जरूरत पड़ने पर कुछ अन्य दलों से बात की जाएगी।

बिहार के प्रदेश अध्यक्ष ने प्रारंभिक बातचीत की है लेकिन यह किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है इसलिए दलों का नाम लेना उचित नहीं होगा।

उन्होंने बताया कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में आजम खां और किरनमय नंदा को छोड़कर संसदीय बोर्ड के सभी सदस्य शामिल हुए। यूपी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव और बिहार के अध्यक्ष रामचंद्र यादव को विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में बुलाया गया था।

अकेले लड़ने का फैसला क्यों? रामगोपाल ने ये बताए कारण :

सवाल : क्या अलग चुनाव लड़ने से सेक्युलर ताकतें कमजोर नहीं होंगी? भाजपा को लाभ नहीं मिलेगा?

रामगोपाल : बिल्कुल नहीं। सपा ने बिहार में महागठबंधन से अलग होकर सेक्युलर ताकतों को नुकसान नहीं पहुंचाया है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सेक्युलर ताकतों के वोटों का विभाजन नहीं हुआ था, फिर भाजपा क्यों जीती?

सवाल : गठबंधन से अलग होने से लालू-नीतीश को कितना नुकसान होगा?

रामगोपाल : ज्यादा सीटें जीतेंगे। हम ऐसी संभावनाओं में नहीं जाना चाहते कि उनके अलग होने से गठबंधन को कितना नुकसान होगा?  गठबंधन में सपा को जितनी सीटें मिल रही थीं, अब पार्टी उससे कई गुना सीटों पर जीत हासिल करेगी।

सवाल : यादव सिंह प्रकरण की सीबीआई जांच में कोई डील हुई है क्या?

रामगोपाल : ऐसी अटकलें बेबुनियाद हैं। हमें यादव सिंह की जांच से क्या डर है? यादव सिंह की जांच हो, दूसरे लोगों की भी जांच हो। सब जानते हैं कि यादव सिंह किनका नजदीकी था?
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मोदी व अमित शाह से मुलाकात पर सवाल

सवाल : फिर मोदी और अमित शाह से मुलाकातें क्यों?
रामगोपाल : प्रदेश सरकार के कामकाज में अड़ंगे डाले जा रहे हैं। हम राष्ट्रपति से भी मिले हैं और प्रधानमंत्री से भी। जब भी प्रदेश के लिए पैसों को लेकर या प्रशासनिक मामलों में कोई अड़चन आएगी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फिर मिलेंगे। क्या मोदी से मिलना पाप है?

सवाल : नाराजगी थी तो पटना रैली में शिवपाल सिंह यादव को क्यों भेजा गया?

रामगोपाल :  इस रैली में शामिल होने के लिए सपा पहले ही स्वीकृति दे चुकी थी। इसलिए अपना प्रतिनिधि भेजा गया।

शरद यादव को अब भी उम्मीद : बोले, मुलायम को मना लेंगे
जनता दल (यू) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि हमारे लिए यह न झटका है, न परेशानी का कारण। मुलायम सिंह यादव से मिलकर मामले को सुलझा लेंगे।
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