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आग लगने के ४५ मिनट बाद दी सूचना, संदेह के घेरे में

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साजिश या लापरवाही : आखिर 45 मिनट बाद क्यों दी पुलिस को सूचना
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सूचना देने में देरी की पड़ताल करेगी जांच कमेटी
पिकप भवन में बुधवार शाम आग लगने की सूचना घटना के 45 मिनट बाद पुलिस व फायर कंट्रोल रूम को दी गई। यह जानकारी भी विभागीय कर्मचारियों ने नहीं, बल्कि राहगीरों ने दी। सूचना देने में देरी से जब तक मदद पहुंची, तब तक आग फैल चुकी थी और विभागों की महत्वपूर्ण फाइलें राख हो चुकी थीं। सूचना देने में देरी को देखते हुए मामले में साजिश की बू आ रही है।
फायर स्टेशन ऑफिसर गोमतीनगर मदन सिंह के मुताबिक कर्मचारी नारायण पुरी और मनोज गुप्ता ने उन्हें बताया कि शाम 7.15 बजे वित्त व लेखा अनुभाग के कार्यालय के कमरे से धुआं निकलने लगा। इसकी गंध से पास के कमरे में मौजूद दोनों कर्मचारी बाहर निकले। दोनों ने कमरे का दरवाजा खोला तो धुएं के गुबार के साथ लपटें दिखीं। इस पर शोर मचाकर सुरक्षाकर्मियों को बुलाया। इसके बाद आग बुझाने के प्रयास किए गए। हालांकि तत्काल फायर व पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना नहीं दी। सिंह के मुताबिक रात 8.01 बजे राहगीरों के कंट्रोल रूम को सूचना देने के पांच मिनट बाद पिकप भवन के सुरक्षाकर्मियों ने फोन किया। सूचना देने में देरी की बात जांच कमेटी को खटक रही है। वह इस बिंदु पर गंभीरता से पड़ताल कर रही है।
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एफएसओ गोमतीनगर के मुताबिक सूचना मिलने के 10 मिनट के अंदर दो फायर टेंडर मौके पर भेजे गए। रात 8.10 बजे शुरू हुआ राहत कार्य 10.10 बजे समाप्त हुआ। उधर, चीफ फायर ऑफिसर विजय कुमार सिंह ने बताया कि फायर कंट्रोल रूम को सूचना मिलने से लेकर राहत कार्य समाप्त होने तक के हर चरण को रिकॉर्ड किया गया है। इसे जांच में शामिल किया जाएगा। साथ ही हादसे की सूचना देने में देरी होने के कारण की पड़ताल भी होगी।
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