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आखिर क्यों आकाश साइडलाइन?: यूपी में मायावती ने नहीं दी कोई जिम्मेदारी, क्यों चाहिए बसपा को ब्राह्मणों का साथ

Sat, 27 Jun 2026 09:25 AM IST
Akash Dwivedi अशोक मिश्रा,अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

बहुजन समाज पार्टी ने विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं, लेकिन आकाश आनंद को कोई जिम्मेदारी नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं में असमंजस है। पार्टी ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की रणनीति पर भी काम कर रही है और अधिक ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है।

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आकाश क्यों दूर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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बहुजन समाज पार्टी ने विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रत्याशी चयन की कवायद भी तेजी से जारी है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की भूमिका नहीं होने से कार्यकर्ताओं में ऊहापोह की स्थिति है। बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा भी आकाश की भूमिका को लेकर स्थिति साफ नहीं करने से भी असमंजस बना है।

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पार्टी नेताओं के मुताबिक यूपी की सियासत में आकाश आनंद की गैरमौजूदगी से पार्टी को नुकसान हो सकता है। भले की आकाश ने कोई चुनाव नहीं लड़ा है, लेकिन आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद का मुकाबला करने के लिए बसपा को युवा चेहरे की जरूरत है। 

आकाश को लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी से बाहर करने के बाद जब वापस लिया गया था तो उन्हें यूपी और उत्तराखंड की राजनीति से दूर रखने का फैसला हुआ था। हिंदी पट्टी के दो प्रमुख राज्यों, जहां बसपा का खासा जनाधार भी रहा है आकाश को कोई जिम्मेदारी नहीं देना पार्टी के भविष्य पर असर डाल सकता है।

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ब्राह्मण नेताओं की भी दरकार

दूसरी ओर ब्राह्मण कार्ड के जरिये यूपी में सरकार बनाने की कवायद में जुटी बसपा को बड़े ब्राह्मण नेताओं की दरकार है। अभी तक किसी भी दूसरे दल के कद्दावर ब्राह्मण नेता ने बसपा का दामन नहीं थामा है। पार्टी में शामिल होने वालों में अधिकतर मुस्लिम और ओबीसी नेता हैं। 

वर्ष 2007 में जब बसपा की सरकार बनी थी तब पार्टी में ब्राह्मण नेताओं की भरमार थी। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के कुनबे के ही करीब एक दर्जन से अधिक लोग बसपा से जुड़े हुए थे, जिनमें से अब केवल सतीश मिश्रा ही बचे हैं। पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए जालौन की माधोगढ़ सीट से आशीष पांडेय को पहला प्रत्याशी घोषित कर ब्राह्मणों को लुभाने की कवायद भी की है। उन्होंने ब्राह्मणों को बड़ी संख्या में टिकट देने की घोषणा भी की है।
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