कम अंतर से जीतीं सीटों पर बसपा की खास तैयारी
धौलाना विधानसभा सीट पर बसपा उम्मीदवार ने पिछले चुनाव में भाजपा को पटखनी दी थी पर जीत का अंतर पांच हजार वोटों से कम था। इसी तरह से मांट में बसपा ने रालोद को हराया था। आरक्षित सीट सिधौली पर भी बसपा ने सपा को पटखनी दी थी। चिल्लूपार में भाजपा उम्मीदवार नजदीकी मुकाबले में बसपा प्रत्याशी से हार गए थे। मुबारकपुर में बसपा ने सपा को हराया था। दीदारगंज में भी बसपा ने सपा को पटखनी दी थी। सुरक्षित सीट लालगंज में बसपा ने भाजपा को हराया था। ये सभी सीटें ऐसी हैं जहां जीत का अंतर पांच हजार वोटों से कम रहा था। बसपा इन सात सीटों के लिए खास तैयारी कर रही है। पूरी टीम को कहा गया है कि इन सीटों पर अतिरिक्त मेहनत की आवश्यकता है। ऐसे में अपने अभियान को तेज करें।
सपा ने समीकरण बदले, हर स्तर पर बढ़ाई चौकसी
प्रदेश की जिन 16 सीटों पर सपा पांच हजार से कम वोट से हारी थी, वहां इस बार संगठन की सक्रियता से बूथ प्रबंधन तक पर पुख्ता तैयारी की गई है। गठबंधन की वजह से करीब आधा दर्जन सीटों पर उम्मीदवार भी बदल गए हैं। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल का दावा है कि इस बार कोई भी सीट नहीं हारेंगे। सपा से साथ गठबंधन में शामिल सभी दलों के कार्यकर्ता अपने स्तर पर लगे हुए हैं। जातीय समीकरण पूरी तरह से सपा गठबंधन के पक्ष में है।
193 मतों के अंतर से जीते थे अवतार सिंह भड़ाना
मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट पर सपा और बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे। यहां बसपा भी पूरी ताकत से लड़ी। इसका नतीजा रहा कि महज 193 मतों के अंतर से भाजपा से अवतार सिंह भड़ाना जीते थे। बिजनौर की नजीबाबाद सीट पर भी सपा और बसपा दोनों ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे। लेकिन, वोटकटवा प्रत्याशियों की वजह से भाजपा यह सीट महज 2002 मतों के अंतर से हार गई। सहारनपुर में भाजपा 4636 मतों के अंतर से हारी। यहां बसपा ने मुकेश दीक्षित को टिकट दिया, जिन्हें वोट तो 17,092 ही मिले थे, पर ब्राह्मण मतों में उन्होंने बंटवारा कर सपा के संजय गर्ग की राह जरूर आसान कर दी थी।
दस सुरक्षित सीटों पर रहा कांटे का मुकाबला
मऊ जिले की मुहम्मदाबाद गोहना सुरक्षित सीट से भाजपा के श्रीराम सोनकर बसपा के राजेंद्र कुमार से 538 मतों के अंतर से जीते थे। भदोही में भाजपा के रविंद्रनाथ त्रिपाठी सपा के जहीद बेग से मात्र 1105 अधिक वोट पाकर विधायक बने। यहां बहुजन मुक्ति पार्टी के यादव प्रत्याशी को 1354 वोट मिले, जो सपा के परंपरागत समर्थक माने जाते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में पांच हजार से कम अंतर से हार-जीत वाली सीटों में 10 सुरक्षित श्रेणी की थीं।
दुद्धी में 1085 वोटों से हुई थी हार, 8522 ने चलाया नोटा का सोटा
सोनभद्र की दुद्धी सीट एक मिसाल है, जहां प्रत्याशियों के प्रति नाराजगी ने हार-जीत के समीकरण बदल दिए। इस सीट पर महज 1085 वोटों के अंतर से अपना दल के हरिराम जीते थे। बसपा प्रत्याशी विजय सिंह गोंड दूसरे नंबर पर रहे थे। यानी मुकाबला बेहद कांटे का था। मतों के स्कोर बोर्ड पर नजर दौड़ाएं तो यहां 8522 मतदाताओं ने नोटा के विकल्प का इस्तेमाल किया था।
कम अंतर से हारी सीटों पर 2020 से ही काम में जुट गई थी भाजपा
भाजपा जिन 84 सीटों पर हारी थी, उनके लिए पार्टी ने 2020 में ही खास ऐसे क्षेत्रों में प्रभारी नियुक्त कर हर समीकरण साधने की कोशिश की रणनीति तैयार कर ली थी। इस रणनीति में उन सीटों पर खास फोकस किया गया, जहां वह पांच हजार से कम मतों के अंतर से हारी थी। ऐसी सीटों पर सांसदों के साथ निगम, आयोग और बोर्डों के अध्यक्षों को प्रभारी बनाया गया। प्रभारियों की तैनाती में जातीय समीकरणों को तवज्जो दिया गया। प्रभारियों को हर महीने सीटों का दौरा कर वहां जाजम बिछाने की योजना भी सौंपी गई। सरकार और संगठन की रिपोर्ट के आधार पर पार्टी ने वहां काम शुरू किया।
रणनीति के तहत ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने अगस्त से दिसंबर 2021 के बीच सभाएं कीं। इन क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान और विकास पर जोर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक एक-एक विधानसभा क्षेत्र में 500 से 700 करोड़ रुपये तक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण, शिलान्यास किया। पार्टी के प्रदेश महामंत्री गोविंद शुक्ला बताते हैं, चुनाव प्रचार में पार्टी ने ऐसी सीटों पर ज्यादा फोकस किया है। इन सीटों पर जातीय समीकरण के हिसाब से नेताओं को घर-घर जनसंपर्क और प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है। खासतौर पर इन सीटों पर लाभार्थियों से संपर्क को बढ़ाया जा रहा है।