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जब वैद्य ने बेगम के लिए दवा बताई भीगे चने व हरी घास, पढ़ें ये रोचक वाक्या

Tue, 20 Aug 2019 04:40 PM IST
Amulya Rastogi अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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लखनऊ बहुत पहले से चिकित्सा का बड़ा केंद्र रहा है। वैद्यों की चिकित्सा पद्धतियां मुख्यरूप से खानपान पर ही आधारित थीं। वैद्य कई गंभीर बीमारियों का इलाज ‘कल्प’ पद्धति से पूरी तरह कर देते थे। नवाबों के समय लखनऊ में एक वैद्य श्याम जी हुआ करते थे। उनकी काफी शोहरत थी।
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वे कल्प के विशेषज्ञ थे। मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने ‘अनकहा लखनऊ’ में श्याम जी वैद्य और नवाब साहब के एक मजेदार किस्से का उल्लेख किया है। टंडन ने लिखा है, ‘एक दिन नवाब साहब ने वैद्य की परीक्षा लेने की सोची। नवाब साहब ने देर रात वैद्य जी को संदेशा भिजवाया कि बेगम की तबियत अचानक खराब हो गई है।

वह उनको लेकर आ रहे हैं। थोड़ी देर में एक डोली वैद्य जी के घर के सामने पहुंची। नवाब साहब के गुमाश्ते अंदर वैद्य जी के पास पहुंचे और कहा, ‘बेगम साहिबा आ गईं हैं। आप उन्हें देखकर नुस्खा दे दीजिए। पर, बेगम साहिबा की डोली का परदा नहीं हटेगा।’ वैद्यराज समझ गए कि कुछ न कुछ गड़बड़ है।
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वैद्यराज को दिए तमाम उपहार

उन्होंने कहा, ’जब बेगम साहिबा डोली का परदा भी नहीं हटाएंगी तो मेरे जाने से क्या फायदा। ये धागा ले जाओ और उनकी कलाई की सही नाप ले आओ। मैं उसी से मर्ज पहचान लूंगा।’ गुमाश्ते नाप लेकर अंदर गए। वैद्य जी ने देखा तो समझ गए कि यह किसी पुरुष या महिला की कलाई नहीं बल्कि किसी जानवर का पैर है।

उन्होंने नुस्खा लिखा, ‘मरीज को थोड़े भीगे हुए चने और हरी घास खिलाओ। मरीज ठीक हो जाएगा।’ वैद्यराज ने सही पहचाना था। डोली में बेगम साहिबा नहीं बल्कि बकरी थी। नवाब साहब इससे बहुत खुश हुए और वैद्यराज को तमाम उपहार दिए।
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