बंधन से रोजी-रोटी पर असर कितना?
शादी के कार्ड छपाई से लेकर कैटरर, डेकोरेटर, फ्लोरिस्ट समेत एक बड़ा वर्ग इस कारोबार से जुड़ा है। वेडिंग प्लानर बताते हैं कि एक शादी से कम से कम 500 परिवारों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर वेडिंग प्लान से जुड़ी है। यदि 200-250 बड़े-छोटे वेडिंग प्लानर हैं यानी हजारों परिवारों को इनसे रोजगार मिला हुआ है। पर, अब हालात ऐसे हैं कि जिन्हें दो महीने किसी तरह वेतन मिल भी गया उनके सामने भविष्य का सवाल है।
आंकड़ों से समझें संकट कितना बड़ा
वेडिंग प्लानर्स बताते हैं कि इस साल हिंदू-मुस्लिम को मिलाकर कुल 60 सहालग हैं। लखनऊ में सहालग के एक दिन में औसतन 300 शादियां होती हैं। मार्च से मई तक खाली बीत चुका है। जून भी लगभग खाली ही बीत रहा है। नवंबर-दिसंबर की शादियों को लेकर भी लोग परेशान हैं। मोटे तौर पर 300 रोजाना के औसत से देखें तो 60 दिनों का आंकड़ा 18,000 आता है। शहर में कुछ शादियाें में तो खर्च करोड़ रुपये से भी ज्यादा होते रहे हैं। अगर एक वेडिंग प्लान पर औसतन 5 लाख रुपये का खर्च भी मान लें तो आंकड़ा 900 करोड़ पहुंच जाता है। इनके अलावा शादियों के सीजन में सराफा, कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स, फर्नीचर इन सबके कारोबार में भी तेजी आती है। पाबंदियों से इनपर भी गहरा असर पड़ रहा है।