वाकया 3, जून 2010 का है। डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में मतदान हो रहा था।
प्रदेश में पहली बार मतदान की वेबकास्टिंग का प्रयोग हो रहा था।
उपचुनाव में 17 मतदान केंद्रों पर वेबकैमरे लगाकर वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई थी।
गरमी के दिन थे। एक मतदान केंद्र पर दोपहर के वक्त पीठासीन अधिकारी महोदय को ज्यादा गरमी लगी तो उन्होंने कपड़े उतारकर किनारे रख दिए।
बनियाइन व लुंगी लपेटे पीठासीन अधिकारी तख्त पर बैठकर वोट डलवाने लगे। गरमी और महसूस हुई तो पीठासीन अधिकारी ने लुंगी घुटनों से ऊपर तक चढ़ा ली।
ऊपर बनियाइन और कमर व घुटने के बीच थोड़े से हिस्से में लुंगी लपेटे पीठासीन अधिकारी मस्ती से वोट डलवाने में जुटे थे। वोट डालने आ रही महिलाएं पीठासीन अधिकारी के पहनावे को देखकर झिझक रही थीं।
संयोग से इस मतदान केंद्र से वेबकास्टिंग हो रही थी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में बैठे अधिकारियों ने जब यह नजारा देखा तो तत्काल डीएम को फोन किया गया। जिले की मशीनरी हरकत में आई।
सेक्टर मजिस्ट्रेट ने कहा कपड़े पहनो
सेक्टर मजिस्ट्रेट के जरिये पीठासीन अधिकारी को संदेश भेजा गया और चंद मिनट बाद ही पीठासीन अधिकारी पूरे कपड़े पहनकर मुस्तैदी से वोट डलवाने में जुट गए।
यही नहीं जिन मतदान केंद्रों की वेबकास्टिंग हो रही थी वहां दबंग लोग भी किसी तरह की गड़बड़ी करने का साहस नहीं जुटा सके और पूरा मतदान बेहद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया।
लोकसभा चुनाव में बढ़ेगा वेबकास्टिंग का दायरा
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह वाकया सुनाते हुए कहा कि मतदान की वेबकास्टिंग के फायदे को देखते हुए चुनाव आयोग ने इस बार लोकसभा चुनाव में इसका दायरा बढ़ाने का फैसला किया है।
इस चुनाव में प्रदेश के 8000 से ज्यादा मतदान केंद्रों की वेबकास्टिंग कराने की योजना है। इस पर लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी आलोक तिवारी ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर हर विधानसभा क्षेत्र में वेबकास्टिंग के लिए लगभग 20 पोलिंग स्टेशनों का चयन करने को कहा है।
आम लोग भी देख सकेंगे नजारा
वेबकास्टिंग के लिए चुने जाने वाले पोलिंग स्टेशनों की गतिविधियां सीधे आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में तो देखी ही जाएंगी, इंटरनेट के जरिये आम लोग भी वहां का नजारा देख सकेंगे।
वेबकास्टिंग के लिए ऐसे पोलिंग स्टेशनों का चयन करने को कहा गया है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी आसानी से उपलब्ध हो सके।
किसी भी गड़बड़ी से बचाती है वेबकाटिंग
आयोग के सूत्रों का कहना है कि वेबकास्टिंग से जहां चुनाव कराने वालों पर किसी तरह का पक्षपात न करने का मनोवैज्ञानिक दबाव रहता है वहीं प्रत्याशियों के एजेंट, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और मतदान करने वाले गड़बड़ी करने का साहस नहीं कर पाते।
वेबकास्टिंग के कारण चुनावी अनुशासन में काफी मदद मिलती है। सभी को पता रहता है कि वे कैमरे की जद में हैं और कोई भी ऐसी-वैसी हरकत उन्हें भारी पड़ सकती है।
उन्हें पता रहता है कि बहुत से लोगों की निगाहें उनके ऊपर हैं। ऐसे में कोई गलत काम करने से न सिर्फ उनकी बदनामी हो सकती है बल्कि कानूनी शिकंजे में भी फंस सकते हैं।
यही नहीं अगर कहीं से किसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो आयोग सीधे संबंधित मतदान केंद्र से जुड़कर देख भी सकता है कि वास्तविकता क्या है।
चुनाव को लेकर किसी तरह का विवाद खड़ा होने पर वेबकास्टिंग के जरिये होने वाली रिकार्डिंग का साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल भी किया जा सकता है।