बिजली संकट के कारण प्रदेश में मचा हाहाकार कम हो गया है, जिससे अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली है तो अखिलेश सरकार भी दबाव मुक्त महसूस कर रही है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से लेकर सूबे की राजधानी तक में आंधी-पानी के चलते बिजली की मांग में जबर्दस्त कमी आई है।
ऐसे में बिजली संकट से जूझ रहे लोगों को कुछ राहत मिली है। मांग घटने के कारण ग्रिड से निर्धारित कोटे से लगभग 2000 मेगावाट कम बिजली ली जा रही है और शाम से उन क्षेत्रों को भी लगातार आपूर्ति शुरू कर दी गई है, जहां कटौती का शिड्यूल तय है।
पावर कार्पोरेशन अधिकारियों को राहत
गुरुवार को दिल्ली के आसपास के जिलों से लेकर लखनऊ तक मौसम का मिजाज बदलने के बाद बिजली कटौती से परेशान जनता के साथ ही पिछले लगभग एक महीने से बिजली व्यवस्था पटरी पर रखने के लिए खासी मशक्कत कर रहे पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को भी राहत मिली है।
दोपहर में दिल्ली, नोएडा व आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश और ओले गिरने की खबर आते ही शक्ति भवन स्थित नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं के चेहरे खिल उठे।
उस वक्त तक प्रदेश में बिजली की मांग 13000 मेगावाट के आसपास थी। एनसीआर में मौसम बदलने के बाद मांग में एकाएक 1000 मेगावाट तक की कमी हो गई।
घटी बिजली की मांग
शाम होते-होते राजधानी लखनऊ तथा आसपास के जिलों में भी तेज आंधी के साथ बौछारें पड़ने के बाद बिजली की मांग और घट गई।
शाम छह बजे शक्ति भवन स्थित नियंत्रण कक्ष उत्तरी ग्रिड से अपने निर्धारित कोटे से लगभग 2000 मेगावाट बिजली का अंडरड्राल (तय कोटे कम बिजली का आयात) कर रहा था।
अभियंताओं का कहना है कि चूंकि मांग में एकाएक कमी आने के कारण उपलब्धता बढ़ गई, इसलिए ग्रिड को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल उन क्षेत्रों की आपूर्ति भी शुरू करा दी गई जहां शिड्यूल के मुताबिक कटौती की जा रही थी।
हो रही बिजली आपूर्ति
आंधी-पानी के बाद से ग्रिड पर दबाव कम हो गया और रात आठ बजे पीक आवर्स में भी प्रदेश के ज्यादातर जिलों में आपूर्ति की जा रही थी।
अभियंताओं का कहना है कि मौसम में बदलाव के चलते शुक्रवार को भी बिजली का बहुत ज्यादा संकट नहीं रहेगा।
यूपी पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्र का कहना है कि मौसम बदलने से बिजली की मांग में भारी कमी आई है। बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है, इसलिए पूरे प्रदेश में बिजली आपूर्ति की जा रही है। स्थिति पूरी तरह सामान्य है।
आंधी-पानी के कारण जहां ब्रेकडाउन हुए हैं, उन्हें युद्ध स्तर पर ठीक कराया जा रहा है।