लखनऊ। काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी वर्ष पर मसूदिया गरीब नवाज सोसाइटी ने शनिवार को मुशायरे का आयोजन किया। इस मौके पर कई शख्सियतों को सम्मानित किया गया।
फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी एवं मसूदिया गरीब नवाज सोसाइटी की ओर से उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी ऑडिटोरियम में मसीउद्दीन खान तथा शाहबाज तालिब के संचालन में आयोजित मुशायरे व कवि सम्मेलन में शायर राम प्रकाश बेखुद ने उर्दू की खासियत को कुछ इस अंदाज में पेश किया। उन्होंने पढ़ा कि हमें रोटी तो हिंदी और अंग्रेजी ने दी बेशक, मगर आदाब जीने के हमें उर्दू से आए हैं...। आशुतोष पांडेय ने पढ़ा कि कुछ बचाया नहीं है कल के लिए, आज का दिन मेरा खुशी में गया...।
गुले सबा फतेहपुरी ने सामाजिक दर्द को पेश करते हुए पढ़ा कि हालात के बिगड़ने का अहसास तब हुआ जब लोग मेरे घर के खरीदार हो गए...। डॉ. बलवंत सिंह ने परिवार की स्थिति को पेश करते हुए कहा कि हमारे गम का अंदाजा लगाओ, हमारे घर का बंटवारा हुआ है...। सौरभ जायसवाल ने अपनी कविता, दोस्ती की कभी जुनून पर नहीं गए, हम जमीन पर रहे मून पर नहीं गए, कहीं पहाड़ियों से, दे न दे मुझे धक्का, बस इसी डर से हनीमून पर नहीं गए...पढ़कर दर्शकों को हंसने को मजबूर कर दिया।
अभिश्रेष्ठ तिवारी ने रिश्तों पर चोट करते हुए पढ़ा कि कहा था तुमने की रिश्ता है भाई-भाई का, हिसाब रखा है तुमने तो पाई-पाई का...। शाहबाज तालिब ने पढ़ा कि तरसेंगे वही लोग मुहब्बत की हवा को, जो लोग मुहब्बत का शजर काट रहे हैं...। इसी तरह डॉ. सैयद आसिम मकनपुरी, अमित श्रीवास्तव, सरला शर्मा अस्मां, उस्मान मीनाई, रुबीना अयाज और डॉ. एके रजा अफरोज ने कलाम पेश कर दर्शकों को दाद देने को मजबूर कर दिया। इस मौके पर आयोजित सम्मान समारोह में राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने अखिलेश प्रताप सिंह चौहान, डॉ. रियाज अंसारी सुधा मिश्रा, मोईन अल्वी, मोहम्मद आलम और महताब अहमद को सम्मानित किया। कार्यक्रम के संयोजक असरार अहमद ने मेहमानों का स्वागत किया।