राजधानी लखनऊ में केसरीखेड़ा रेलवे क्रॉसिंग फ्लाईओवर का काम अटकने से सात महीने से परेशानियां झेल रही करीब पांच लाख की आबादी को बड़ी राहत मिली है। सेतु निगम के इस अहम प्रोजेक्ट की राह में आ रहा जमीन का विवाद खत्म हो गया है।
केसरीखेड़ा फ्लाईओवर को गति देने के लिए कुल 31 लोगों ने मुआवजा लेने पर सहमति दी। इनमें श्रीमती कमलेश यादव, राकेश यादव, संत विलास यादव, राकेश, रामकुमार, राम किशोर, दिनेश सिंह, राजाराम, रामस्वरूप, रामजीवन यादव, प्रेमलाल यादव, उमामल्ह, मंजू लता, कमला मौर्या, रत्नेश उर्फ रत्ना सिंह, पंकज दुबे, रेखा दुबे, शोभा, विनय कुमारी, राम लखन, स्नेहलता द्विवेदी, राम मिलन, बृजलाल यादव, सरिता मिश्रा, अवधेश कुमार, राम किशोर, निर्भय, नित्यराम, भैरवती शर्मा, प्रतिभा व राजू हैं।
सेतु निगम का कहना कि फ्लाईओवर का प्रमुख अवरोध कॉम्प्लेक्स धीमी गति से टूट रहा है। इसके पूरी तरह ध्वस्त होने व मलबा उठाने में सात-आठ दिन लग जाएंगे। इसके बाद फ्लाईओवर के अधूरे काम को गति मिल सकेगी। शनिवार तक कॉम्प्लेक्स की तीसरी मंजिल का आधे से ज्यादा हिस्सा टूट चुका था।
अधूरे फ्लाईओवर के कारण दिक्कतें झेल रही जनता को राहत दिलाने के लिए अमर उजाला ने मुहिम शुरू की। इसके तहत सिलसिलेवार तरीके से खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की गईं। इसका असर हुआ कि बड़े जिम्मेदार शासन तक तलब हुए और इन्हें अल्टीमेटम मिला कि फ्लाईओवर का काम पूरा कराएं। इसके बाद सेतु निगम, लोक निर्माण, एलडीए व जिला प्रशासन के अफसरों ने जुटकर बाधा को दूर किया।