तमाम दावों के बावजूद गोमती नदी में बढ़ते प्रदूषण से खफा एनजीटी की अनुश्रवण समिति ने एनजीटी से सफाई के लिए प्रदेश सरकार से 100 करोड़ करोड़ रुपये की गारंटी जमा करने की सिफारिश की है। अनुश्रवण समिति ने लोगों को आगाह किया है कि गोमती में प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि इसमें नहाने या नदी किनारे घूमने से परहेज करें।
इसके किनारे सुबह सैर करना भी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। नदियों एवं जलाशयों के प्रबंधन के लिए बनी अनुश्रवण समिति के चेयरमैन जस्टिस डीपी सिंह ने एनजीटी को भेजी रिपोर्ट में कहा कि आदेशों के अनुपालन की गारंटी के लिए यह फंड जमा कराया जाए।
यह भी टिप्पणी की कि यह नदी आज तक प्रदूषण से इसलिए मुक्त नहीं हो पाई क्योंकि राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार के चलते मुख्य सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारी संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे हैं।
समिति ने पिछले दिनों सचिव व पूर्व जिला जज राजेंद्र सिंह, एडवोकेट कमिश्नर चेतनरायन सिंह और यूपीपीसीबी व सीपीसीबी के अधिकारियों के अलग-अलग निरीक्षण के बाद की है।
पानी में कई जगह ऑक्सीजन शून्य के करीब
प्रतीकात्मक तस्वीर
1 लाख लीटर सीवरेज बिना शोधन गिरा दिया गया गोमती में
रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ की नगर निगम सीमा में 34.75 लाख आबादी रहती है। प्रति व्यक्ति रोजाना सीवरेज 194 लीटर है। वर्ष 2018 में 2,46,375 लाख लीटर सीवरेज निकला। वहीं, सभी एसटीपी मिलाकर 1,44,349 लाख लीटर सीवरेज ही शोधित कर सके।
1,02,026 लाख लीटर सीवरेज और गंदा पानी ऐसे ही गोमती में बहा दिया गया। इससे जल प्रदूषण अत्यधिक बढ़ा हुआ है। अलग-अलग जगहों पर नदी के पानी की जांच में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य के करीब मिली, जो खतरनाक है।
हर्जाने की सिफारिश
एनजीटी में हर्जाने की सिफारिश
6.84 करोड़ रुपये यूपीपीसीबी पर क्योंकि गोमती की गंदगी के लिए नगर निगम व नगर पालिका पर कभी पर्यावरणीय हर्जाना नहीं लगाया।
5 करोड़ रुपये ननि पर पर्यावरणीय हर्जाना
3 करोड़ जल निगम पर, एसटीपी, एसपीएस के 24 घंटे न चल पाने व नदी में कूड़ा गिराने के चलते
1-1 करोड़ रुपये गोमती नदी को मैला करने के लिए 10 जिलों के नगर निगम व नगर पालिका पर।
‘100 करोड़ का फंड प्रमुख सचिव वित्त अनुपालन गारंटी के रूप में जमा कराना सुनिश्चित कराएंगे। दो साल में सभी नाले बिना शोधन के नदी में गिरना बंद न हुए तो पर्यावरणीय हर्जाने के रूप में इस राशि को जब्त कर इसका इस्तेमाल गोमती के पर्यावरण सुधार को होगा। - राजेंद्र सिंह, सचिव, अनुश्रवण समिति