बरामद हुए ब्लड पैकेट्स।
- फोटो : amar ujala
नसीम के अनुसार, वह अपने घर में ही नशे के आदी प्रोफेशनल ब्लड डोनर को कुछ पैसे का लालच देकर ब्लड निकाल लेता था और फिर उसमें सलाइन वाटर मिलाकर एक यूनिट से दो यूनिट खून बनाकर इसे पैक्ड रेड ब्लड सेल (पीआरबीसी) बताकर बेचता था।
उसने बताया कि पीआरबीसी यूनिट में ब्लड की मात्रा कम होती है। जिससे आसानी से दो यूनिट खून तैयार हो जाता है। तैयार ब्लड को काले कारोबार से जुड़े अन्य लोग हॉस्पिटल में मरीजों के तीमारदारों को झांसे में लेकर उनसे ब्लड बैंक से बिना बदले कम पैसे में खून दिलाने का भरोसा दिलाकर सलाइन वाटर मिला हुआ रक्त प्रति यूनिट 2000 रुपये से 3000 में बेच देता हूं।
यहीं से चल रहा था रक्त का अवैध कारोबार।
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इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी मोहम्मद नसीम पुत्र स्वर्गीय जाकिर अली, थाना हसनगंज, सीतापुर रोड, लखनऊ का रहने वाला है। नसीम अपने घर से अवैध ब्लड बैंक चलाता था। इसके अलावा राशिद अली उर्फ आतिफ पुत्र स्वर्गीय शौकत अली, वजीर बाग जरही पुराना लखनऊ। इसका काम अवैध ब्लड डोनर को लाना और बनाए गए खून को बेचना होता था। राघवेंद्र प्रताप सिंह पुत्र राम देव वर्मा, ग्राम हरई थाना देवा तहसील नवाबगंज, बाराबंकी। जो कि ब्लड बैंक का टेक्नीशियन है का काम ब्लड की व्यवस्था करना था।
वहीं, पंकज कुमार त्रिपाठी पुत्र पारस नाथ त्रिपाठी शीतल पुरवा पोस्ट हुजूरपुर बहराइच। ब्लड बैंक में लैब अटेंडेंट है जो कि प्रोफेशनल ब्लड डोनर से रक्त लेकर नसीम को देता था। हनी निगम पुत्र स्वर्गीय अमरेश कुमार निगम, निशातगंज लखनऊ का रहने वाला है जो कि ब्लड बैंक के जाली स्टीकर व अन्य पेपर प्रिंट तैयार करता था। ये ब्लड निकालना और ब्लड डोनर का इंतजाम भी करता था।