राज्य सरकार ने घरों में वॉटर मीटर लगाने को हरी झंडी दे दी है। पहले चरण में आगरा, इलाहाबाद, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी व मथुरा में वाटर मीटर लगाए जाएंगे।
इसकी जिम्मेदारी जल निगम को दी गई है। मीटर लगाए जाने के बाद खर्च के आधार पर वॉटर टैक्स लिया जाएगा।
यानी कम पानी खर्च करने वालों को कम और अधिक खर्च करने वालों को अधिक बिल भरना पड़ेगा। विशेष सचिव नगर विकास श्रीप्रकाश सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।
जवाहर लाल नेहरू अरबन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) योजना की पहली शर्त है कि जिन शहरों में इस योजना के तहत काम चल रहा है, वहां आवासीय व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में वाटर मीटर लगाकर खर्च के आधार पर पानी के बिल की वसूली की जाएगी।
प्रदेश के सात शहरों आगरा, इलाहाबाद, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी व मथुरा में इस योजना के तहत काम चल रहा है। इसलिए पहले चरण में इन्हीं शहरों में वाटर मीटर लगाने का निर्णय किया गया है।
विशेष सचिव नगर विकास ने इस संबंध में जल निगम के प्रबंध निदेशक को निर्देश दिया है कि डोमेस्टिक वाटर मीटर लगाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।
जल निगम ने इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। इलेक्ट्रॉनिक डोमेस्टिक वॉटर मीटर के लिए टेंडर पूर्व में ही लिए जा चुके हैं।
मीटर लगाने की प्रक्रिया जनवरी में शुरू करने की तैयारी है। वॉटर मीटर लगाए जाने के बाद लोगों को नए टैरिफ के आधार पर टैक्स भरना होगा। नए दर पर वॉटर टैक्स लागू करने का अधिकार जल संस्थानों को होगा।