घाघरा का जलस्तर भले ही कम होने लगा हो लेकिन बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रहीं। दो वक्त की रोटी के साथ मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा होता जा रहा है। वहीं एक दर्जन से अधिक गांवों में पानी भरा होने की वजह से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा है। वहीं मंगलवार को अपर जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
घाघरा नदी का पानी तेजी से घट रहा है लेकिन अभी भी वह खतरे के निशान से 21 सेमी. ऊपर बह रहा है। नदी का पानी कम होने के बाद भी तराई के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों बधौली पुरवा, टेपरा, भैरवकोल, सरायं सुरजन, तेलवारी, सनावा, भयक पुरवा, परसावल, नव्वनपुरवा आदि में अभी भी पानी भरा हुआ है। जिससे संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बना हुआ है।
वहीं गांवों को जाने वाले संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने और पर्याप्त संख्या में नाव नहीं मिल पाने से बाढ़ पीड़ितों आवागमन में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ पीड़ित निजी संसाधनों से गांवों से तटबंध पर पहुंच रहे हैं। वहीं जो लोग अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर बसे हुए हैं उनकी दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही है।