लखनऊ। दर्द की वजह से सामान्य प्रसव न हो पाने पर पानी में प्रसव कराना भी बेहतर विकल्प है। इससे महिलाएं गैर जरूरी सर्जरी से बच सकती हैं। महाराष्ट्र की प्रो. पूनम वर्मा शिवकुमार ने शुक्रवार को केजीएमयू के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में ऑब्स एंड गाइनी सोसाइटी के सम्मेलन में यह जानकारी दी।
प्रो. पूनम ने बताया कि सामान्य के मुकाबले सिजेरियन प्रसव ज्यादा जोखिम वाला होता है। भविष्य में इसके कई दुष्परिणाम सामने आते हैं। इससे महिला को कमजोरी, संक्रमण का खतरा और अगला प्रसव सामान्य होने की संभावना कम हो जाती है। इसके बावजूद कई बार दर्द से और कई बार सुविधा के लिए लोग सिजेरियन प्रसव का रास्ता अपनाते हैं। इसे देखते हुए पानी में प्रसव कराने का विकल्प दिया जाता है।
इसमें गर्म पानी के टब में महिला का प्रसव कराया जाता है। गर्म पानी से दर्द कम होता है। बच्चा गर्भ में भी पानी में डूबा रहता है, इसलिए यह ज्यादा सुरक्षित भी रहता है। सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि पानी में प्रसव के साथ ही महिला की सुविधा के अनुसार करवट लेकर, उकड़ू बैठकर भी प्रसव कराया जा सकता है।
गर्भधारण से पहले हो काउंसिलिंग
केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर और ऑब्स एंड गाइनी सोसाइटी की सचिव डॉ. सीमा मेहरोत्रा ने कहा कि गर्भधारण से पहले काउंसिलिंग की सुविधा होनी चाहिए। इससे जोखिम वाले प्रसव का प्रबंधन पहले ही किया जा सकता है। इसके लिए काउंसिलिंग सेंटर की व्यवस्था होनी चाहिए।
नियमित जांच और प्रसव से पहले अस्पताल तय करना जरूरी
केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुजाता देव ने बताया कि सुरक्षित प्रसव के लिए गर्भवती की नियमित जांच और अस्पताल का पहले से ही तय होना जरूरी है। प्रसव के बाद ज्यादा खून बहना भी खतरनाक होता है। इसलिए, सभी गर्भवती महिलाओं को सलाह है कि प्रसव हमेशा अस्पताल या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की देखरेख में कराएं।
तेजी से बढ़ रहे सिजेरियन प्रसव
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सिजेरियन प्रसव का मानक पांच से 15 फीसदी है। इसके बावजूद सिजेरियन प्रसव की दर तेजी से बढ़ रही है। डॉ. सीमा मेहरोत्रा के अनुसार इस समय 40 से 50 फीसदी प्रसव सिजेरियन हो रहे हैं।
इन कारणों से होता है सिजेरियन प्रसव
पूर्व में सिजेरियन प्रसव, भ्रण का वजन सामान्य से ज्यादा होना, बांझपन, प्रसव दर्द न होना, बीपी बढ़ना, एक से ज्यादा भ्रूण, भ्रूण के आसपास द्रव्य कम हो जाना और भ्रूण को सही से ऑक्सीजन न मिलना।
कार्यक्रम में चिकित्सक और अन्य महिलाएं।
कार्यक्रम में चिकित्सक और अन्य महिलाएं।