लंबे समय से चले आ रहे वक्फ बोर्ड विवाद पर यूपी सरकार के कद्दावर मंत्री आजम खां को करारी शिकस्त मिली है। इसे शिया मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
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दरअसल, शिया धर्मगुरु से मुलाकात के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने शिया वक्फ बोर्ड के चुनाव एक बार फिर स्थगित करने का हुक्म जारी कर दिया। सरकार ने इस पर मुहर लगाकर एक बार फिर आजम खां को हाशिये पर खड़ा कर दिया है।
और आजम ने फुला लिया मुंह
मुलायम सिंह यादव के इस फैसले से आजम खां भी बुरी तरह नाराज हो गए हैं। पता चला है कि सोमवार सुबह राजधानी में शुरू हुए उर्दू अकादमी के अवॉर्ड फंक्शन में आजम को शिरकत करनी थी, पर वे बहाना बनाकर यहां नहीं पहुँचे।
जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि आजम कोपभवन में हैं और उनका सीयूजी फोन भी ऑफ हो गया है। खबर है कि आजम बनारस से लखनऊ के लिए सड़क मार्ग से आ रहे हैं लेकिन अवॉर्ड देने के लिए उनका पहुंचना नामुमकिन सा है।
वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार पर था बवाल
बीते कई दिनों से मौलाना जव्वाद ने आजम के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। अलविदा की नमाज के बाद से ही शुरू हुए आजम खां के खिलाफ प्रदर्शन में वक्फ बोर्ड में हुए भ्रष्टाचार का आरोप उन पर मढ़ा जा रहा था।
मौलाना का आरोप था कि आजम की रहनुमाई में वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार होता आया है और एक बार फिर भ्रष्ट लोगों को चुनाव लड़ाने की पूरी तैयारी है।
अलविदा की नमाज के बाद लखनऊ में हुए बवाल में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बुरी तरह पीटा, तो मौलाना ने इसका ठीकरा भी आजम के सिर पर फोड़ दिया।
मौलाना ने नवनियुक्त राज्यपाल राम नाइक से मिलकर आजम को मंत्री पद से हटाने की भी मांग कर डाली। इसके बाद, आजम को अपनी सफाई में एक प्रेस कांफ्रेंस भी करनी पड़ी थी।
नवंबर 2013 में भी नहीं हुआ चुनाव
उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चुनाव को लेकर लगातार विवाद
खड़े हो रहे थे। रविवार को नया पेंच सामने आया, वोटर लिस्ट में शामिल मुतवल्ली को
लेकर मौलाना कल्बे जव्वाद नाराज हो गए।
गौरतलब है कि बसपा सरकार के समय भंग हुए शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड का चुनाव अब तक अधर में है। सपा सरकार नवंबर 2013 में इसके चुनाव करा रही थी, लेकिन धार्मिक आयोजनों और मौलाना जव्वाद की आपत्ति के चलते चुनाव नहीं हुआ।
लगाए गए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
इसके बाद जुलाई 2014 में नोटिफिकेशन जारी हुआ, लेकिन इस दौरान रमजान आ
जाने के कारण चुनाव नहीं हुआ। अब इस महीने चुनाव कार्यक्रम तय किया गया तो बोर्ड की वोटर लिस्ट को लेकर विवाद शुरू हो गया।
मौलाना कल्बे जव्वाद का आरोप है कि वोटर लिस्ट में वक्फ संपत्तियों के सौदागरों को शामिल कर लिया गया है।
न्यायालय
में जिन पर वक्फ के मामले चल रहे हैं, उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएं।
जव्वाद को मुख्य रूप से पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी का नाम वोटर लिस्ट में
शामिल किए जाने पर आपत्ति है।
उधर, पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी का कहना है कि उन पर अभी आरोप साबित
नहीं हुआ है। वे यह भी कहते हैं कि मौलाना जव्वाद सरकार पर दबाव बनाकर वोटर
लिस्ट में अपने करीबियों को शामिल करना चाहते हैं।
तालकटोरा कमेटी
के फैजी को कमेटी के अध्यक्ष नवाब आगा की आपत्ति के बाद हटाया गया है। इस
मुद्दे को लेकर भी मौलाना चुनाव टालना चाहते हैं।
वसीम रिजवी का
कहना है कि मौलाना जव्वाद सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काकर खुद का फायदा
चाहते हैं, ताकि उनके करीबी बोर्ड में शामिल हो जाएं।
वे यह भी कहते
हैं कि सरकार को अगर शिया वक्फ बोर्ड को सुन्नी वक्फ बोर्ड में शामिल करना
होता तो वह चुनाव को लेकर तीसरी बार नोटिफिकेशन जारी नहीं करती।