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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर विश्व हिंदू परिषद के ट्रस्ट का दावा मजबूत, सरकार भी थी समर्थन में

Wed, 20 Nov 2019 04:59 PM IST
ishwar ashish धीरेंद्र सिंह/अमर उजाला, अयोध्या
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अयोध्या (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
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राममंदिर निर्माण का हक हासिल करने की लड़ाई में विश्व हिंदू परिषद के ट्रस्ट का दावा मजबूत दिख रहा है। फैसला आने से पहले भी सरकार इस ट्रस्ट के साथ न सिर्फ खड़ी थी बल्कि, सुप्रीम कोर्ट में न्यास को आवंटित भूमि लौटाने की पैरवी भी कर चुकी है। अब बदले परिदृश्य में सरकार के समक्ष अयोध्या एक्ट के प्रावधानों के तहत भी विहिप ने रामजन्मभूमि न्यास का दावा प्रस्तुत कर दिया है। यह काम रामालय ट्रस्ट के दावे से पहले का बताया जा रहा है। पूरे अभियान की अगुवाई अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय कर रहे हैं, उनके साथ कानूनी सलाहकारों की एक टीम भी है।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विराजमान रामलला के भव्य मंदिर निर्माण की कवायद अयोध्या एक्ट के प्रावधानों के तहत होनी है। इसे लेकर केंद्र सरकार को अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए न्यास के चयन से लेकर संपत्ति के प्रबंध व प्रशासन की योजना बनानी है। सूत्र बताते हैं कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सक्रिय हैं, भव्य और दिव्य राममंदिर से लेकर अयोध्या को पर्यटन हब बनाने की योजना पर मंथन चल रहा है।

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ये कहते हैं पूर्व सांसद विनय कटियार

विनय कटियार - फोटो : ANI
अयोध्या मामले में शुरूआत से सक्रिय रहे पूर्व सांसद विनय कटियार कहते हैं कि जिस अयोध्या एक्ट का जिक्र करके रामजन्मभूमि न्यास को अयोग्य होने की बात रामालय ट्रस्ट के लोग कर रहे हैं, उन्हें सच्चाई पता नहीं है। विहिप का न्यास पूरी तरह परफेक्ट है। अयोध्या एक्ट 7 जनवरी 1993 को बना था, जबकि इसके प्रावधानों के अनुरूप विहिप ने एक न्यास का गठन 25 जनवरी 1993 को कर लिया था।

श्रीरामजन्मभूमि न्यास व रामजन्मभूमि न्यास दोनों एक ही हैं, बस उसी ट्रस्ट को बदलते गये हैं। वे बताते हैं कि आंदोलन की शुरूआत श्रीरामजन्म मुक्ति यज्ञ समिति से हुई थी, तब अयोध्या-काशी-मथुरा तीनों लेने की बात थी, मगर बाद में पहले रामजन्मभूमि लेने और फिर आगे की लड़ाई का संकल्प लिया गया। संघ ने उन्हें अयोध्या की पूरी कमान सौंपी थी। उन्होंने बजरंग दल का गठन करके जनमानस को आंदोलित किया।

बाबरी ध्वंस से लेकर भव्य राममंदिर निर्माण के लिए संघर्ष में मुख्य अगुवा स्व. अशोक सिंहल और स्व. गिरिराज किशोर जैसे लोग थे। फैसले के बाद मंदिर निर्माण का स्वरूप अब साफ होता जा रहा है। उपाध्यक्ष चंपत राय की अगुवाई में सरकार से बात चल रही है। सरकार ने तो पहले भी ट्रस्ट को जमीन वापस लौटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी, तो अब फैसला आने के बाद कैसे विहिप को नजरंदाज किया जा सकता है।

सरकार पर पूरा भरोसा, सब आंदोलन से निकले लोग

अयोध्या (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
विहिप के पूर्वी उत्तर-प्रदेश प्रभारी अंबरीश का कहना है कि राममंदिर निर्माण के स्वरूप पर सरकार से विहिप के शीर्ष नेता चंपत राय की अगुवाई में बात कर रहे हैं। राममंदिर मुद्दे का समाधान राष्ट्र व राम के स्वाभिमान की पुन: प्रतिष्ठा का महायज्ञ है। इससे बड़ी खुशी हमारे लिए और क्या हो सकती थी। जो मंदिर बने वह हिंदुत्व की भावना का प्रतिनिधित्व करने वाला हो। ट्रस्ट तय करने से लेकर बाकी चीजें सरकार करेगी लेकिन, मंदिर का प्रबंधन हिंदुत्व की भावना के अनुरूप ही होना चाहिए। हमें सरकार पर पूरा भरोसा है, वे लोग इसी आंदोलन से निकलकर आए हैं।

नरसिम्हा राव बिगाड़ना चाहते थे आंदोलन, तब सतर्क हुई विहिप
पूर्व सांसद व श्रीरामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य महंत डॉ रामविलास दास वेदांती का कहना है कि बाबरी ढांचा ध्वस्त होने के समय केंद्र में कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा राव सरकार थी। संघ-विहिप पर प्रतिबंध लगाकर नरसिम्हा राव 1993 में अयोध्या एक्ट के जरिए हमारे आंदोलन व भूमिका को खत्म करना चाहते थे। इसीलिए स्वामी स्वरूपानंद की अध्यक्षता में रामालय ट्रस्ट का गठन भी करवाया था। इस मंशा को भांपकर विहिप सतर्क हो गई थी। अयोध्या एक्ट के तहत विहिप की जो तैयारी हुई थी, जो कुछ लोगों तक की बात है, इसे शेयर नहीं किया जा सकता है। अब न्यास की मंदिर निर्माण की तैयारी से लेकर उसके पूजित मॉडल व भूमिका को कैसे सरकार नजरंदाज नहीं कर सकती है।

कारसेवकपुरम में 23 नवंबर को आएगा अधिवक्ताओं का दल

अयोध्या (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा का कहना है कि यहां श्रीरामजन्मभूमि न्यास के नाम से ही काम व चंदे-दान की रसीदें है, जिसका पंजीकरण सन 1989 का है, अयोध्या एक्ट आने के बाद रामजन्मभूमि न्यास का नया ट्रस्ट 1993 में बनने की जानकारी मेरे पास नहीं है। वेबसाइट पर यह दिख रहा है, लेकिन हमें पता नहीं है। अब 23 नवंबर को विहिप से जुड़े शीर्ष अधिवक्ताओं का दल अयोध्या आ रहा है, वही इस बारे में स्पष्ट बता सकता है।

श्रीरामजन्मभूमि रामालय न्यास के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कहते हैं कि अयोध्या एक्ट के मुताबिक रामालय ट्रस्ट राममंदिर निर्माण के लिए विधिक और व्यावहारिक दोनों तौर पर सर्वाधिक उपयुक्त है। हमने रामलला का मंदिर बनाने और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी की मांग केंद्र सरकार से की है। लेकिन विहिप के 1993 के न्यास के सामने आने से वह भी प्रमुख दावेदार हो जाएगी। हम उनके बायलॉज का अध्ययन कराएंगे।

विहिप की राम मंदिर निर्माण को लेकर यह है तैयारी

- फोटो : amar ujala
मंदिर केवल पत्थरों से बनेगा, सीमेंट-लोहा नहीं लगेगा। मंदिर दो मंजिला होगा, जो 270 फीट लंबा, 135 फीट चौड़ा और शिखर 125 फीट ऊंचा होगा। हर मंजिल पर 106 खंभे होंगे, भूतल के खंभे 16.5 फीट ऊंचे, उसके ऊपर तीन फीट मोटे पत्थर की बीम, उसके ऊपर एक फीट मोटी पत्थर की छत होगी। ऊपर की मंजिल के खंभे 14.5 फीट ऊंचे, फिर बीम व छत के बाद शिखर होगा। मंदिर की दीवारें छह फीट मोटे पत्थरों की व चौखट सफेद संगमरमर के पत्थर से बनेगी। पूरा मंदिर बनने में 1 लाख 75 हजार घनफुट पत्थर लगना है। इसमें से 1 लाख घनफुट से ज्यादा पत्थर तराशे जा चुके हैं। मंदिर का सिंह द्वार, नित्य मंडप, गर्भगृह की शिलाएं और भूतल का हिस्सा पूरी तरह तैयार है।

कार्यशाला में अभी कोई कारीगर नहीं
फिलहाल विहिप की कार्यशाला में मंगलवार तक कोई कारीगर पत्थर तराशने का काम नहीं कर रहा है। इससे पहले 1992 से 1998 तक कार्यशाला में 80 से 100 कारीगर काम कर रहे थे। विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा कहते हैं कि पत्थरों में काई जम गई है। इन्हें साफ करने के लिए 300 कारीगर लगाए जाएंगे। रामजन्मभूमि न्यास ने 1992 में लगभग 45 एकड़ में रामकथा कुंज बनाने कि योजना बनाई थी। इसके लिए हमने तैयारी कर रखी है। राम के जन्म से लेकर लंका विजय और फिर अयोध्या वापसी तक के स्वरूप को पत्थरों पर उकेरा जाएगा। 125 मूर्तियां बनाई जानी हैं। अब तक 24 मूर्तियां तैयार हो चुकी हैं।
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रामालय ट्रस्ट के प्रस्तावित मंदिर का यह है स्वरूप

- फोटो : फाइल फोटो
श्रीराम जन्मभूमि रामालय ट्रस्ट के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि माता कौशल्या की गोद में रामलला की 108 फीट ऊंची प्रतिमा होगी। मंदिर का शिखर 1008 फीट ऊंचा होगा। रामलला का दिव्य विग्रह होगा, 22000 वर्गमीटर में मंदिर बनेगा। एक लाख आठ हजार भक्त यहां एक साथ पूजा-दर्शन कर सकेंगे। विश्व हिन्दू परिषद ने बिना जमीन का मालिकाना हक मिले नक्शा बनाकर मंदिर का मॉडल बनाया और चंदा वसूल लिया। हमारा न्यास जमीन के हिसाब से नक्शा बनाकर मंदिर निर्माण कराएगा।
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