हरिद्वार के अखंड परमधाम में होने वाली बैठक में देश भर के लगभग 250 हिंदू संत और महात्मा हिस्सा लेंगे। विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार पिछले दिनों कह चुके हैं कि राम मंदिर निर्माण को लेकर अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं किया जा सकता। इस मुद्दे को टाला न जाए।
हिंदुओं को भगवान राम के स्थान पर उनके मंदिर के अलावा और कुछ भी स्वीकार नहीं होगा। जाहिर है कि हरिद्वार की बैठक में संतों के एजेंडे में यह मुद्दा प्रमुखता से रहेगा।
विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा बताते हैं कि बैठक में सामाजिक समरसता और आबादी असंतुलन पर भी विशेषतौर से बातचीत होगी। उन्होंने कहा कि तमाम विघटनकारी ताकतें हिंदुओं को जातियों में बांटकर उनकी ताकत को कमजोर कर रही हैं। विहिप हिंदू समाज को जातियों की खेमेबाजी से निकालकर हिंदू विरोधी ताकतों को जवाब देगी।
जातियों को समाप्त तो नहीं किया जा सकता, लेकिन विहिप का प्रयास इन सबके बीच मधुर भाव पैदा करने की है। इसी के साथ आबादी असंतुलन पर सरकार से कारगर नीति बनाने की मांग भी इस बैठक के माध्यम से की जाएगी।
शर्मा की बातों से साफ है कि हरिद्वार बैठक के जरिये भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने की जमीन बनाने की तैयारी है। ये मुद्दे भाजपा की सियासी लड़ाई को 80 बनाम 20, अर्थात संपूर्ण हिंदू समाज को एकजुट करने और समान नागरिक संहिता लागू करने का माहौल बनाने की कोशिश का हिस्सा नजर आते हैं।