एनजीटी और प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के बावजूद लखनऊ समेत प्रतिबंधित जिलों में जमकर पटाखे दागे गए। दिवाली के दिन शाम सात बजे से देर रात तक पटाखों चलते रहे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर पुलिस ने सिर्फ एफआईआर ही दर्ज की।
इसे रोकने के लिए उसके पास न तो कोई प्लान था और न ही तैयारी। सरकार के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के सर्वाधिक 17 मामले मुजफ्फरनगर में दर्ज हुए। इसी तरह बुलंदशहर में 11, मेरठ में 10, हापुड़ में 7 और गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट व बागपत में 6-6 मुकदमे दर्ज किए गए।
जबकि लखनऊ कमिश्नरेट और वाराणसी में 2-2 मुकदमे दर्ज किए गए। यानी जिन जिलों में पटाखों की बिक्री व चलाने पर प्रतिबंध था, वहां नियमों के उल्लंघन के कुल 61 मुकदमे दर्ज किए गए। एयर क्वालिटी इंडेक्स की रिपोर्ट के अनुसार 14 नवंबर को लखनऊ के कई इलाकों में एक्यूआई 1,400 से अधिक रिकॉर्ड किया गया। इससे साफ है कि लखनऊ में पटाखों पर प्रतिबंध का किसी तरह का कोई असर नहीं था।