हैंडपंप खराब, पीने का पानी नहीं मिल रहा। स्ट्रीट लाइट भी खराब हो गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर या स्टाफ नहीं, स्कूल में टीचर नहीं आते। इन छोटी-छोटी समस्याओं के लिए अब सरकारी बाबुओं से जूझना नहीं होगा।
इसके लिए अलग-अलग सरकारी विभागों में जाने की जरूरत भी नहीं। गांव के लोग अब सीधे अपने मोबाइल से शिकायत कर सकेंगे। इसके लिए बस इंटरनेट की जरूरत होगी। गांवों को स्मार्ट विलेज बनाने की यह पूरी कवायद विलेज इन्फॉर्मेशन सिस्टम की मदद से होने जा रही है।
गांवों को स्मार्ट विलेज बनाने की नींव यूपी रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (यूपीआरएसएसी) रख चुका है। इसके लिए जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) की मदद से एक सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसके लिए जरूरी निर्णय सहायक प्रणाली (डीएएस) तैयार की जा रही है।
इसमें स्कूलों, अस्पताल, नजदीकी थाना, पानी के लिए उपलब्ध स्रोत जैसी सूचनाएं शामिल की जा रही हैं। यह कवायद यूपी के सभी जिलों के लिए शुरू की गई है।
शुरू होगा स्मार्ट विलेज का काम
प्रोजेक्ट से जुड़े एक वैज्ञानिक ने बताया कि सभी 75 जिलों की एक बार जीआईएस मैपिंग की जानी है। इससे उदाहरण के तौर पर स्कूल या अस्पतालों को जीआईएस नक्शे पर मैप कर दिया जाएगा। इस डाटाबेस को पूरे यूपी में कहीं भी एक्सेस कर देखा जा सकता है।
इस पूरे डाटाबेस को एक सिस्टम से कनेक्ट कर शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था रहेगी। यूपीआरएसएसी के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. राजेश उपाध्याय ने बताया कि मार्च 2015 तक काम पूरा होना है। इसके बाद स्मार्ट विलेज की थीम पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
सफल रहा पायलट प्रोजेक्ट
विलेज इन्फॉर्मेशन सिस्टम की मदद से बुंदेलखंड के पांच जिलों में स्मार्ट विलेज पर काम कर चुके प्रोजेक्ट एसोसिएट अरविंद कुमार का कहना है कि एक वेबसाइट के जरिये 45 गांवों को विलेज इन्फॉर्मेशन सिस्टम से जोड़ा गया। जहां यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से सफल रहा।
ये होगा गांवों को फायदा
- गांव से ही शिकायत करने की आजादी
- अपने नजदीक मौजूद सुविधाएं पता करने की छूट
- अपनी शिकायत पर लापरवाही की निगरानी व दोबारा शिकायत
- शिकायत करने के लिए केंद्रीय व्यवस्था
गांवों तक तकनीक पहुंचाने पर जोर
केंद्र सरकार की सांसद आदर्श ग्राम योजना और इसी तरह यूपी की अलग-अलग योजनाओं में गांवों तक तकनीक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। विलेज इन्फॉर्मेशन सिस्टम केंद्र और राज्य सरकार की इसी मंशा को पूरा करने का माध्यम भी हो सकता है।