गाजियाबाद में 41वीं वाहिनी पीएसी की जमीन को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित करे जाने के मामले में विजिलेंस पहले उस एनओसी की जांच करेगी, जिसे लेकर विवाद बना हुआ है।
जहां बिल्डर का दावा है कि एनओसी उसे पीएसी अधिकारियों द्वारा दी गई, वहीं वाहिनी के सेना नायक ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
पीएसी की जमीन पर बिल्डर का दावा समाप्त करने और वहां पर निर्माण के लिए स्वीकृत मानचित्र को खारिज करने के लिए वाहिनी के सेनानायक प्रवीण कुमार द्वारा शासन से आग्रह किया जा चुका है।
इसी आग्रह पर पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने मामले की सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) से जांच कराने के निर्देश दिए थे।
इस बीच उच्च अधिकारियों ने अपने स्तर से भी मसले को निपटाने के लिए पीएसी, प्राधिकरण व राजस्व परिषद के एक सदस्य की समिति बनाकर जमीन की पैमाइश कराने के लिए कहा था।
पैमाइश का काम इसी सप्ताह किया जाना प्रस्तावित है। यह पैमाइश राजस्व परिषद के नक्शों के आधार पर होगी।
विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक, अगर किसी विभाग की जमीन को प्राधिकरण किसी को आवंटित करता है तो प्राधिकरण संबंधित विभाग से इसके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल करता है।
इसे उस फर्म या व्यक्ति को देता है, जिसके नाम यह संबंधित भूमि आवंटित की गई है। लेकिन गाजियाबाद के मामले में ऐसा नहीं हुआ है।
प्राधिकरण ने भी पूर्व में यह कहा था कि उसके द्वारा बिल्डर को कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने कहा था कि उन्होंने भूमि का जो आवंटन किया था वह अपने नक्शे के आधार पर किया था।
इसी वजह से इस मामले में विवाद की जड़ बनी एनओसी की विजिलेंस सबसे पहले जांच करेगी।