मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधायकों को अपने क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिवर्ष दी जाने वाली डेढ़ करोड़ रुपये विधायक निधि को बढ़ाकर दो करोड़ रुपये कर दिया है। यह राशि जीएसटी से मुक्त रहेगी और इसकी प्रतिपूर्ति राज्य सरकार करेगी।
सीएम ने विधायकों को अपने क्षेत्र में सौ-सौ हैंडपंप लगवाने का भी तोहफा दिया है। इसके अलावा पांच लाख रुपये तक और विशेष परिस्थिति में 10 लाख तक के कामों को ई-टेंडरिंग से मुक्त रखने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री मंगलवार को विधानसभा में विधानमंडल के बजट सत्र के अंतिम दिन बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि की अधिक जवाबदेही होती है। लोगों की अपेक्षाएं होती हैं, पर जन प्रतिनिधि के पास ज्यादा अधिकार नहीं होते। इसलिए वह विधायक निधि बढ़ा रहे हैं।
कार्यकर्ताओं को साधा
मालूम हो कि हर काम की ई-टेंडरिंग से भाजपा कार्यकर्ता खफा थे। पार्टी की बैठकों में इसको लेकर कई बार सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए थे। माना जाता है कि मुख्यमंत्री कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए यह फैसला किया है। इससे पहले सरकार पिछले दिनों लोगों व कार्यकर्ताओं की नाराजगी देखते हुए मिट्टी की खोदाई को प्रतिबंध मुक्त करने का फैसला किया था।
विधानसभा में विपक्ष के नेता सुरेश श्रीवास्तव ने मांग रखी कि विधायकों को प्लॉट और आवास दिया जाए। इस पर सीएम योगी ने कहा कि हम लोगों को स्वयं की सुविधाओं के लिए मांग नहीं रखनी चाहिए क्योंकि उस पर टिप्पणी होती है।
सीएम ने कहा कि 2022 तक हर गरीब को छत मुहैया कराने का हमारा लक्ष्य है, पहले हमें उनकी सुविधाओं पर ध्यान देना है। योगी ने कहा कि सभी विधायकों के पास तो आवास है फिर ऐसी मांग करना सही नहीं।