उत्तर प्रदेश में इस साल के शेष नौ महीने भी चुनावों का सिलसिला चलता रहेगा। अप्रैल में विधान परिषद में स्थानीय निकाय क्षेत्र की 36 सीटों पर चुनाव होगा। जुलाई में परिषद में विधानसभा क्षेत्र कोटे की 13 सीटों का चुनाव होगा। जुलाई में ही राज्यसभा की 11 सीटों के लिए चुनाव होगा और नवंबर-दिसंबर में नगरीय निकाय संस्थाओं के चुनाव होंगे।
विधान परिषद में स्थानीय निकाय क्षेत्र की 36 सीटों पर चुनाव 9 अप्रैल को होगा। 15 मार्च से नामांकन दाखिल किए जाएंगे। लगभग सभी जिले के चुनाव से जुड़े होने के कारण चुनाव की आचार संहिता लागू रहेगी। सरकार के नीतिगत निर्णय करने पर रोक रहेगी और तबादले करने के लिए निर्वाचन आयोग की मंजूरी लेनी होगी। उधर, प्रदेश में 17 नगर निगम में महापौर व पार्षद, 199 पालिका परिषद में पार्षद व अध्यक्ष और 438 नगर पंचायतों में सभासद व अध्यक्ष का चुनाव भी नवंबर-दिसंबर में होगा। उस दौरान प्रदेश के शहरी क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता लागू रहेगी।
28 अप्रैल व 26 मई को होंगे तीन-तीन सदस्य मनोनीत
विधान परिषद में सपा के बलवंत सिंह रामूवालिया, जाहिद हसन उर्फ वसीम बरेलवी और मधुकर जेटली का कार्यकाल 28 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। प्रदेश में भाजपा की संस्तुति पर तीन नए सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। इसी तरह विधान परिषद में मनोनीत कोटे के सपा के डॉ. राजपाल कश्यप, अरविंद कुमार सिंह और डॉ. संजय लाठर का कार्यकाल भी 26 मई को समाप्त हो जाएगा। प्रदेश सरकार की संस्तुति पर तीन नए सदस्यों की नियुक्ति 26 मई तक की जाएगी।
जुलाई में होगा परिषद के 13 सदस्यों का चुनाव
विधान परिषद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जगजीवन प्रसाद, बलराम यादव, डॉ. कमल कुमार पाठक, रणविजय सिंह, राम सुंदरदास निषाद, शतरुद्र प्रकाश, अतर सिंह राव, दिनेश चंद्रा, सुरेश कुमार कश्यप, दीपक सिंह और भूपेंद्र सिंह का कार्यकाल 6 जुलाई को समाप्त हो रहा है। जुलाई में परिषद की 13 सीटों पर चुनाव होगा। इसमें करीब 3 से 4 सदस्य सपा और 8 से 9 सदस्य भाजपा के निर्वाचित होंगे। विधान परिषद सदस्य ठाकुर जयवीर सिंह के विधायक निर्वाचित होने से उनके इस्तीफे से खाली होने वाली सीट पर भी उप चुनाव आगामी दिनों में कराया जाएगा।
जुलाई में कांग्रेस विहीन हो जाएगी विधान परिषद
विधान परिषद में कांग्रेस के एक मात्र सदस्य दीपक सिंह का कार्यकाल 6 जुलाई में समाप्त हो जाएगा। विधानसभा में कांग्रेस के मात्र दो ही विधायक होने के कारण सपा के सहयोग के बिना कांग्रेस विधान परिषद चुनाव नहीं लड़ सकेगी। कांग्रेस और सपा के मौजूदा संबंधों को देखते हुए माना जा रहा है कि जुलाई में विधान परिषद में कांग्रेस का एक भी सदस्य नहीं होगा। इस तरह विधान परिषद के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब कांग्रेस का कोई सदस्य नहीं होगा।
विधान परिषद में बसपा के भी एक मात्र सदस्य रहेंगे
विधान परिषद में बसपा के 4 में से 3 सदस्यों का कार्यकाल 6 जुलाई को समाप्त हो जाएगा। जबकि पार्टी के भीमराव आंबेडकर का कार्यकाल 5 मई 2024 को पूरा होगा। ऐसे में जुलाई 22 से मई 2024 तक विधान परिषद में भीमराव ही बसपा के एकमात्र सदस्य रहेंगे। विधानसभा चुनाव में इस बार पार्टी को महज एक सीट मिली है। ऐसे में भाजपा या सपा का सहयोग नहीं मिला तो मई 2024 के बाद परिषद में बसपा का एक भी सदस्य नहीं रहेगा।