सोमवार को विधान परिषद की कार्यवाही हंगामे के कारण नहीं चल सकी। समाजवादी पार्टी ने पहले इलाहाबाद में दलित छात्र की हत्या का मामला उठाया और उसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा समाजवादी पार्टी को आतंकवादी कहे जाने पर हंगामा किया।
सभापति नरेश यादव को पहले 30 मिनट के लिए फिर 12 बजे तक के लिए और आखिर में चार मिनट की कार्यवाही के बाद मंगलवार तक के लिए परिषद की कार्यवाही स्थगित कर दी।
परिषद की कार्यवाही शुरू हुई तो परिषद में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने इलाहाबाद के कर्नलगंज में दलित छात्र को पीट-पीट कर मार डालने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अपराधी बेखौफ हो गए हैं।
इलाहाबाद में दलित छात्र की पीटपीट कर हत्या कर दी जा रही है, लखनऊ में भाजपा नेता के बेटे की हत्या हो जा रही है। राजधानी में ही तीन-तीन घंटे डकैती पड़ रही है और मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि गोली का जवाब गोली से दिया जाएगा।
इसी दौरान बसपा के नेता सदन सुनील चित्तौड़ खड़े हुए और उन्होंने भी प्रदेश की खराब कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाया। इस पर नेता सदन महेंद्र सिंह ने कहा कि अभी प्रश्नकाल का समय है। नेता प्रतिपक्ष किस नियम के तहत इस पर चर्चा कर रहे हैं।
उनके रोक टोक से समाजवादी पार्टी के सदस्य और उत्तेजित हो गए और अपने हाथों में अखबारों में छपी खबर की पेपर कटिंग के साथ वेल में आ गए और हंगामा करने लगे। सपा सदस्यों की मांग थी कि मुख्यमंत्री अपने बयान पर माफी मांगें, जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी के लोगों को आतंकवादी कहा था।
सपा के सदस्य शांत नहीं हुए तो सभापति ने विधान परिषद की कार्रवाई पहले 30 मिनट के लिए और फिर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। 12 बजे सदन की कार्यवाही जैसे ही दोबारा शुरू हुई समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया और समाजवादियों को आतंकवादी कहे जाने पर मुख्यमंत्री से माफी की मांग करने लगे।
सपाई वेल में हंगामा कर रहे थे और सभापति ने कार्यसूची के अनुसार कार्यवाही जारी रखी। पांच मिनट की औपचारिकताओं के बाद सदन को हंगामे के बीच मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।