विधान परिषद में भी समाजवादी पार्टी भाजपा को रोकने का पूरा प्रयास कर रही है। भाजपा को रोकने के लिए जहां कांग्रेस और बसपा एक हो गए हैं। वहीं सपा का दावा है कि एमएलसी चुनावों में भाजपा की पोल खुल जाएगी। यूपी में सिंचाई और जलसंसाधन मंत्री शिवपाल यादव ने दावा किया है कि इन चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। साथ ही शिवपाल यादव ने कहा है कि इस हार के बाद भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को इस्तीफा दे देना चाहिए।
विधान परिषद की 12 सीटों के लिए मतदान शुरू हो चुका। देर शाम तक चुनाव नतीजे घोषित हो जाने की उम्मीद है। गुरुवार को देर रात तक नेताओं के टेलीफोन बजते रहे। चुनाव की पूर्व संध्या पर दिख रहे राजनीतिक परिदृश्य से साफ हो गया है कि भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस, बसपा और रालोद ने हाथ मिला लिए हैं। बावजूद इसके भाजपा अब भी अपने दोनों उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रही है। इससे साफ संकेत हैं कि शुक्रवार को कुछ विधायक क्रॉस वोट कर सकते हैं।
समाजवादी पार्टी वैसे तो खुद को निश्चिंत दिखाने की कोशिश कर रही है, पर गुरुवार को जिस तरह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लंच व डिनर पर विधायकों को बुलाकर उनका हालचाल पूछा, उससे लग रहा है कि कहीं न कहीं सपा भी चिंतित है। बावजूद इसके कि कांग्रेस ने अपने विधायकों का वोट उसके उम्मीदवारों को देने का ऐलान कर रखा है।
वादों व वास्तों की दुहाई
अपने-अपने उम्मीदवार की जीत के लिए गुरुवार को दिन भर वादों व वास्तों की दुहाई के दौर जारी रहे। रालोद ने बसपा का साथ देने का वादा पूरी ईमानदारी से निभाने का वचन दोहराया तो रालोद विधायकों की बैठक में पहुंचे बसपा के नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भी इस एहसान को हमेशा ध्यान में रखने की बात कही। कांग्रेस ने अपने विधायकों को सपा के साथ रहने की नसीहत देते हुए बसपा का भी खयाल रखने की सलाह दी।
सूत्रों के अनुसार, विधान मंडल दल नेता प्रदीप माथुर ने विधायकों को आज सुबह बता दिया होगा कि कौन विधायक सपा के उम्मीदवार को वोट देंगे तो कौन बसपा का साथ देंगे। सपा, कांग्रेस, बसपा और रालोद के एकजुट होने के बावजूद भाजपा ने हार नहीं मानी है।
भाजपा ने विधायकों को बताए वोटे देने के तौर-तरीके
जानकारी के मुताबिक, यहां हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने जहां अपने विधायकों को वोट देने का तौर-तरीका बताया, वहीं अपने संपर्कों के जरिये दूसरी जगह से भी वोट का जुगाड़ करने की जिम्मेदारी भी सौंपी। विधायकों को कहा गया कि उन्हें मतपत्र में प्रत्याशी के सामने सिर्फ गिनती में 1 लिख देना है।
इसके अलावा और कुछ नहीं लिखना है। बैठक में पार्टी के 41 में से लगभग 12 विधायक नहीं थे, पर विधान मंडल दल के नेता सुरेश खन्ना ने बताया कि सभी रात तक लखनऊ पहुंच जाएंगे। विधायकों से कहा गया है कि शुक्रवार सुबह उन्हें बता दिया जाएगा कि कौन किसे वोट देगा। सूत्रों की मानें तो भाजपा का मुख्य जोर दूसरे दलों के विधायकों से दूसरी वरीयता का वोट हासिल करने पर भी है।
गणित अपना-अपना
सपा : आठों उम्मीदवारों की जीत के लिए चाहिए प्रथम वरीयता के 256 वोट। 230 विधायक सपा के। कांग्रेस के विधायकों का साथ। कुछ निर्दलीय व छोटी पार्टियों के विधायकों के भी वोट मिलने की उम्मीद। सपा का दावा-आठों उम्मीदवारों की जिताने लायक वोट।
बसपा : तीनों उम्मीदवारों की जीत के लिए चाहिए प्रथम वरीयता के 96 वोट। 80 विधायक बसपा के। रालोद के आठ विधायकों का समर्थन। सपा की जरूरत से बचे कांग्रेस के वोट मिलने का संकेत। बसपा का भी सभी तीनों उम्मीदवारों की जीत का दावा।
भाजपा : दो उम्मीदवारों की जीत के लिए प्रथम वरीयता के 64 वोटों की जरूरत। 41 विधायक भाजपा के। इसके अलावा कुछ निर्दलीयों व छोटे दलों के विधायकों के समर्थन का भरोसा।
बसपा, रालोद व कांग्रेस के कुछ विधायकों का भी साथ मिलने की उम्मीद। विधायकों की अंतरात्मा की आवाज पर पड़ने वाले वोटों से दोनों प्रत्याशियों की जीत का भाजपा का दावा।