विधानमंडल सत्र के इस बार काफी हंगामेदार रहने के आसार है। सरकार को विपक्ष के कई तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
मुजफ्फरनगर दंगा से लेकर गन्ना किसानों की समस्या तक पर विपक्ष सरकार को घेरेगा।
भाजपा विधायकों संगीत सोम व सुरेश राणा ने अपने ऊपर रासुका लगाने के मामले को सदन में विशेषाधिकार हनन के रूप में उठाने का फैसला किया है।
मुजफ्फरनगर दंगा पर हुए स्टिंग ऑपरेशन की जांच रिपोर्ट को लेकर भी सदन में सवाल उठ सकते हैं।
रहेगी मुजफ्फरनगर दंगे की गूंज
वैसे तो विधानमंडल का एक संक्षिप्त सत्र सितंबर में हो चुका है। उसमें भी मुजफ्फरनगर दंगा का मामला गूंजा था।
बावजूद इसके यह सत्र दंगे की आंच से अछूता नहीं रह पाएगा। पिछले सत्र में भाजपा विधायक संगीत सोम व सुरेश राणा पर कार्रवाई का मुददा गरम हुआ था।
सत्रावसान होने के साथ ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में दोनों पर रासुका लगा। एडवाइजरी बोर्ड के फैसले के बाद दोनों पर से इसे हटा लिया गया।
दोनों रिहा हो चुके हैं। भाजपा ने इस मामले को सदन में उठाने का ऐलान कर रखा है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी न सिर्फ इस मामले को उठाने की बात कह रहे हैं बल्कि यह भी कहते हैं कि विशेषाधिकार हनन की याचिका भी देंगे।
अन्य दल भी मुजफ्फरनगर मामले को किसी न किसी रूप में उठाने की तैयारी कर चुके हैं।
किसानों की मुसीबतों पर होगा हंगामा
किसानों की समस्याओं को लेकर भी विपक्ष की तरफ से सरकार पर सवालों की बौछार होगी। खासतौर से गन्ना किसानों की समस्या को लेकर सभी दलों ने अपनी कमर कस ली है।
भले ही सरकार ने चीनी मिलें चलवाने की राह बना ली हो, लेकिन इसमें हुई देरी से गन्ना किसानों के नुकसान के बारे भी विपक्ष सरकार से सवाल करने की तैयारी में है।
इसके अलावा धान खरीद, गेहूं बीज संकट का मामला सदन में गूंज सकता है तो किसानों की आत्महत्या सरकार की मुसीबत बननी लगभग तय है।