वजह जो भी हो लेकिन विश्व हिंदू परिषद में अपना चेहरा बदलने की छटपटाहट काफी तेज हो गई है। वह चाहती है कि उसकी पहचान सिर्फ मंदिर वाले संगठन की न रहे बल्कि हिंदुत्व के पैरोकार संगठन के साथ ही सामाजिक संगठन के रूप में भी स्वीकार्यता हो।
इसके लिए विहिप ने ‘आदर्श ग्राम-आदर्श घर’ योजना शुरू करने का फैसला किया है। पूरी योजना से साफ पता चलता है कि विहिप चाहती है कि उसे पर्यावरण व सामाजिक सरोकारों का ध्यान रखने वाले संगठन के रूप में भी पहचाना जाए।
‘आदर्श ग्राम-आदर्श घर’ योजना के तहत विहिप कार्यकर्ता पहले चरण में राम महोत्सव समारोह की तैयारियों के लिए प्रदेश के 50 हजार और देश के लगभग 1.50 लाख गांवों में संपर्क करेंगे। वे लोगों से अपने गांव में पंचवटी वाटिका स्थापित करने को कहेंगे और साफ-सफाई के साथ ही सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध समिति गठित कराएंगे।
दूसरे चरण में कार्यकर्ता जून से अगस्त तक गांवों में जाकर लोगों को बरगद, पीपल, बेल, आंवला और तुलसी के पौधे देकर उन्हें लगाने की अपील करेंगे। पूर्व में गठित समिति को इन पेड़ों की सुरक्षा व देखभाल की जिम्मेदारी भी सौंपेंगे।
सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध दिलाएंगे संकल्प
समिति के माध्यम से ग्रामीणों को पर्यावरण और गांव की सफाई पर ध्यान देने के अलावा सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूक किया जाएगा। संकल्प दिलाया जाएगा कि वे अपने गांव को नशामुक्त बनाने के साथ-साथ युवकों को दहेज रहित विवाह के लिए प्रेरित करें। हर बच्चे को स्कूल भेजने के लिए राजी किया जाएगा।
विहिप की योजना इन गांवों में गरीबों को रोजगार मुहैया कराने में मदद के लिए शिक्षण व प्रशिक्षण केंद्र खोलने की भी है। इसके तहत गरीब घरों की महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई या दस्तकारी जैसे काम सिखाकर उन्हें परिवार चलाने लायक कमाने के लिए तैयार किया जाएगा।
पहले चरण में इन गांवों पर फोकस
योजना के अनुसार पहले चरण में श्रीराम महोत्सव वाले गांवों को ही ‘आदर्श ग्राम-आदर्श घर’ के लिए चुनने का फैसला किया गया है। भगवा रणनीतिकारों की मंशा यह है कि जिस गांव में उनका आधार बने उसे काफी मजबूत बना दिया जाए। उसके बाद आगे बढ़ा जाए।
इसीलिए इस अभियान को सांस्कृतिक सरोकारों से जोड़ने की भी योजना बनी है। तय किया गया है कि गांव-गांव बनने वाली समितियां उन स्थानों पर जहां श्रीराम महोत्सव होंगे, वहां लगातार सामाजिक सरोकारों व जागरूकता के लिए कार्यक्रम करेंगी। विहिप के लोग भी वहां जाकर गांव वालों से संपर्क व संवाद रखेंगे।
21 मार्च से होंगे श्रीराम महोत्सव
विहिप ने भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 21 मार्च से 1 अप्रैल तक देश के डेढ़ लाख गांवों में श्रीराम महोत्सव आयोजित करने की योजना बनाई है। इसके तहत हर गांव में भगवान श्रीराम की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। एक सप्ताह तक भजन-कीर्तन होंगे और लोगों को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का संकल्प दिलाया जाएगा।
विहिप इन गांवों को ढाई फीट की भगवान श्रीराम की प्रतिमा भी उपलब्ध कराएगी। विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि उनके संगठन की कोशिश है कि समाज के सहयोग से गांवों की तस्वीर बदली जाए।
गांव न सिर्फ स्वच्छ व पर्यावरण के अनुकूल हों बल्कि वहां के संस्कार लोगों को प्रभावित करें। इसके लिए श्रीराम महोत्सव वाले स्थानों का ही चयन करने की मुख्य वजह यह है कि एक स्थान पर पूरी तरह लोगों को जागरूक किया जाए।
इस तरह उनके साथ तालमेल बनाने से न सिर्फ ठोस काम होगा बल्कि इन गांवों को उदाहरण के रूप में दूसरों के सामने रखा जा सकेगा।