पार्टी की दुर्दशा पर लखनऊ, उन्नाव और बिजनौर आदि जिलों में पदाधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है। 90 के दशक से कांग्रेस से जुड़े एक नेता कहते हैं कि हम नए प्रयोगों के खिलाफ नहीं है। मगर ये फैसले एक टीम के तहत लिए जाने चाहिए। अगर बाहर से आए कुछ लोग मनमाने ढंग से फैसला लेंगे तो फिर इससे बेहतर नतीजों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। यह नई ऊर्जा के साथ जुटने और नेतृत्व करने वाली टीम में बदलाव का वक्त है ताकि अगले दो साल कड़ी मेहनत से पार्टी लोकसभा चुनाव तक बेहतर स्थिति में आ सके।
प्रतिक्रिया पर निष्कासन उचित नहीं : ओंकार नाथ सिंह
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ओंकार नाथ सिंह ने इस बारे में सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने लिखा है कि हार के बाद गुस्सा आना स्वाभाविक है और नेतृत्व को लोगों की बात सुननी चाहिए। क्या कारण थे, जिससे हमारी यह स्थिति हुई। हमें केवल ढाई प्रतिशत ही वोट मिले, जबकि बसपा को एक सीट ही मिली पर वोट उसको 12 प्रतिशत मिले। ओंकार आगे लिखते हैं कि हम अपनी पीड़ा नेतृत्व से नही कहेंगे, तो किससे करेंगे। नेतृत्व का भी इतनी जल्दी किसी भी प्रतिक्रिया पर किसी को भी पार्टी से निष्कासित करना उचित नहीं है। उसे लोगों के असंतोष को भी सुनना चाहिए।