राजधानी लखनऊ में कोरोना के नए केस मिलने में उतार-चढ़ाव जारी है। वहीं, विदेश में संक्रमण के बढ़ते मामलों से भारत में भी चौथी लहर को लेकर लोग आशंकित हो रहे हैं। इसे लेकर केजीएमयू के विशेषज्ञों का कहना है कि दो लहर के बीच कम से कम छह महीने का अंतर रहता है।
भारत में तीसरी लहर को खत्म हुए अभी दो महीने ही बीते हैं। इस लिहाज से फिलहाल चौथी लहर आने की आशंका कम ही है। इसके बावजूद विशेषज्ञ संक्रमण से बचने के लिए प्रोटोकॉल का पालन और टीकाकरण कराने की सलाह दे रहे हैं।
केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी हिमांशु के अनुसार संक्रमण के मामलों में उतार-चढ़ाव है फिर भी चौथी लहर की आशंका अभी बेहद कम है। उनके अनुसार जिन देशों में इस समय कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, वहां दूसरी और तीसरी लहर का प्रभाव बेहद कम रहा है। चीन में इस समय मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन दूसरी व तीसरी लहर में वहां मामले बेहद कम हैं।
भारत में टीकाकरण को लेकर काफी अच्छा काम हुआ है। चौथी लहर को रोकने में इसकी भी बड़ी भूमिका रहेगी। हालांकि, अभी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, लेकिन चौथी लहर को लेकर कुछ महीने बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
वहीं, केजीएमयू के प्रोफेसर सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज के डॉ. शैलेंद्र सक्सेना का भी कहना है कि कोरोना के नए मामलों की संख्या कम हो चुकी है। इसे देखते हुए फिलहाल चौथी लहर की आशंका कम ही है। इसके बावजूद लोगों को सलाह है कि टीकाकरण कराएं और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें।