लोकबंधु अस्पताल में 40 वेंटिलेटर में से एक पर भी भर्ती नहीं है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि यूनिट चल रही है, पर मरीज नहीं आ रहे हैं। अति गंभीर मरीजों को भर्ती न करके बड़े संस्थान का हवाला देकर लौटा दिया जाता है।
उधर, सिविल अस्पताल के दस वेंटिलेटर में से सात पर बच्चों की भर्ती हो रही है। हालांकि यहां भी तीन वेंटिलेटर बंद हैं। यही हाल राम मिश्र सागर अस्पताल का है, यहां चार वेंटिलेटर लगाए गए हैं। पर स्टाफ न होने से यूनिट बंद है।
केजीएमयू और लोहिया में वेटिंग
बड़े संस्थान मरीजों की रिपोर्ट मंगाकर वेटिंग में रखते हैं। वेंटिलेटर खाली होेने पर उन्हें निजी अस्पतालों से शिफ्ट कराया जाता है। केजीएमयू, लोहिया संस्थान और एसजीपीजीआई में रोज दो से तीन मरीज वेंटिलेटर की आस लेकर आते हैं, लेकिन उन्हें लौटना पड़ा रहा है।