केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर की वेंटीलेटर यूनिट कोमा में है। 21 बेड की इस
यूनिट में से 9 वेंटीलेटर खराब हैं।
हालत ये है कि गंभीर मरीजों को
वेंटीलेटर व आईसीयू के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। जबकि
सरकारी अस्पतालों की एक मात्र वेंटीलेटर यूनिट को भी केजीएमयू प्रशासन चला
नहीं पा रहा है।
केजीएमयू ट्रॉमा वेंटीलेटर
यूनिट के बेड खाली न होने के कारण मरीजों को वापस लौटाया जा रहा है।
अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने के लिए लंबी लिस्ट है।
पीजीआई और ट्रॉमा
सेंटर के अतिरिक्त किसी भी सरकारी अस्पताल में वेंटीलेटर यूनिट नहीं है।
दोनों ही अस्पतालों में भर्ती के लिए मरीजों की लाइन लगी हुई है।
ट्रॉमा
सेंटर में वेंटीलेटर यूनिट में 21 बेड हैं। इनमें से नौ कई महीने से खराब
पड़े हैं। ट्रॉमा प्रशासन ने इन वेंटीलेटर के खराब होने की जानकारी
केजीएमूय प्रशासन को दे दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सितंबर महीने में
सुम्बुल की मौत भी ट्रॉमा सेंटर यूनिट में वेंटीलेटर देर से मिलने के कारण
हुई थी।
इस दौरान काफी हंगामा भी हुआ था लेकिन केजीएमयू प्रशासन ने भी फिर
इस यूनिट को भुला दिया। सूत्रों की मानें तो पुराने वेंटीलेटर खराब हो चुके
हैं।
इनकी रिपेयरिंग पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं लेकिन इसका
मरीजों को कोई फायदा नहीं मिला।