भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वैंकैया नायडू ने राजनीतिकों के भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई को फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मांग की है।
नायडू ने कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य रशीद मसूद को सजा का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि लालू और मसूद के जेल जाने से राजनेताओं को सबक मिलेगा।
साथ ही सीबीआई को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने को उसे स्वतंत्र एजेंसी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सोनिया का आरोप गलत है।
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का मजाक भाजपा ने नहीं कांग्रेस और खुद सोनिया के सुपुत्र राहुल गांधी ने उड़ाया है। नायडू मंगलवार को यहां भाजपा मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृहमंत्री सुशील शिंदे और उ.प्र. के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव देश व समाज में आग लगाने का काम कर रहे हैं।
नायडू ने कहा कि भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देना कांग्रेस की पुरानी आदत व संस्कार है। इसीलिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद लालू व रशीद मसूद जैसे दागियों को बचाने के लिए अध्यादेश लाने का फैसला हुआ।
जिससे 30 सितंबर को लालू यादव और रशीद मसूद सजा के बावजूद सदन का सदस्य बनाए रखा जा सके।
पर, कांग्रेस जब घिरने लगी तो उसके उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अजय माकन की प्रेस कांफ्रेंस में पहुंचकर अध्यादेश को फाड़कर कूड़े की टोकरी में फेंक देने का जुमला उछाल दिया। नायडू ने कहा कि रशीद मसूद व लालू के जेल जाने से बाकी नेताओं को सबक मिलेगा।
कांग्रेस अपने दामन में झांके
नायडू ने कहा कि भाजपा को कांग्रेस से राजनीतिक शिष्टाचार सीखने की जरूरत नहीं है। सोनिया गांधी भाजपा को आदर्श सिखाने के बजाय अपने सुपुत्र को शिष्टाचार सिखाए।
नायूड ने चुटकी ली कि भाजपा के लोग विचारक और कांग्रेस के लोग उनके प्रचारक हैं। तभी तो सोते-जागते कांग्रेस के नेताओं को भाजपा की याद आती रहती है।
सोनिया को भी शायद याद नहीं रहा कि प्रधानमंत्री के अमेरिका जाते वक्त राहुल ने दागियों को बचाने के लिए लाए गए अध्यादेश को ‘नानसेंस’ अर्थात बुद्धिहीनता वाला फैसला करार देकर प्रधानमंत्री का अपमान किया था। अच्छा होगा कि सोनिया, भाजपा के बजाय राहुल को समझाएं।
कांग्रेस व सपा के बीच तुष्टीकरण की होड़
नायडू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा के बीच मुसलमानों के तुष्टीकरण की होड़ है। अखिलेश उस मौलाना को शांति का अग्रदूत बनाकर बुलाते हैं, जो दंगा कराने का दोषी है।
केंद्रीय गृहमंत्री सुशील शिंदे मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखकर एक वर्ग विशेष के लोगों की आतंक के नाम पर गिरफ्तारी न करने की हिदायत देते हैं। इन तरीकों से समाज में शांति नहीं आएगी। उल्टे स्थिति बिगड़ेगी।
शिंदे को अपना आदेश वापस लेना चाहिए। अखिलेश को भी इस तरह के फैसले करने के बजाय शांति स्थापित करने की कोशिश करनी चाहिए।