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जांच में पकड़ा गया वेंडिंग माफियाओं का खेल

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जांच में पकड़ा गया वेंडिंग माफिया का खेल : खुद की दुकान, लग्जरी कार, बनने चले थे पटरी दुकानदार
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हजरतगंज और अमीनाबाद जैसे पॉश इलाके में धुरंधर भी पटरी दुकानदार बनने की कतार में हैं। इनके पास खुद की बड़ी दुकानें हैं। लग्जरी कार से चलते हैं।
ये सड़क पर ठेला-खोमचा भी नहीं लगाते, लेकिन पटरी दुकानदार का प्रमाणपत्र पाने की कोशिश में हैं। इसके लिए इन्होंने फर्जीवाड़ा कर आवेदन भी कर डाला है।
वेंडिंग जोन में पटरी दुकान लगाने के लिए आए 12311 आवेदनों की जांच में इसका खुलासा हुआ है। जांच टीम को आधे से अधिक आवेदन फर्जी मिले हैं।
पटरी दुकानदारों को व्यवस्थित कर वेंडिंग जोन में बसाने के लिए गत एक से 10 जून तक पंजीकरण किया गया था। इसमें 12311 लोगों ने वेंडिंग जोन में दुकान लगाने की जगह पाने के लिए आवेदन किया।
ये आवेदन उन लोगों से मांगे गए थे जो शहर में कहीं न कहीं ठेला-खोमचा या फुटपाथ पर दुकान लगाते हैं। प्राप्त आवेदनपत्रों का मौके पर सत्यापन शुुरू हुआ तो चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है।
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रिपोर्ट के तहत हजरतगंज रामतीरथ वार्ड में वेंडिंग जोन में दुकान लगाने के लिए 1014 लोगाें ने खुद को पटरी दुकानदार बताते हुए वेंडिंग प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था।
इनमें 450 ही सही मिले, बाकी 564 आवेदन फर्जी निकले। आवेदन पत्र में जिस जगह दुकान लगाने का दावा किया था, वहां उस नाम के किसी व्यक्ति दुकान नहीं मिली।
इसी तरह वीवीआईपी माने जाने वाले विक्रमादित्य वार्ड में 140 लोगों ने आवेदन किया था, लेकिन जांच में सिर्फ 70 सही पाए गए। बाकी 70 आवदेक फर्जी मिले।
इसी तरह अन्य वार्डों में भी फर्जी पटरी दुकानदार सामने आए हैं। अलीगंज वार्ड में 300 आवेदनों में करीब 100 फर्जी मिले।
किराए पर जगह उठाने को फर्जी आवेदन
जानकारों ने बताया कि अमीनाबाद, नजीरबाद, गुईन रोड में करीब 1000 पटरी दुकानदार और ठेले-खोमचे वाले हैं। इनमें से करीब 600 ऐसे हैं जो फुटपाथ बेचने वाले दबंगों को दुकान लगाने के लिए रोज 400 से 600 रुपये तक देते हैं। यह खेल बहुत पुराना है। अब फेरी नीति का कानून बन जाने के बाद दबंगों का यह खेल बंद हो जाएगा। इसीलिए अब ऐसे लोगों ने बड़ी संख्या में फर्जी आवेदन करा दिए।
हजरतगंज व अमीनाबाद में सबसे मारामारी
पटरी दुकानदारों के लिए हजरतगंज और अमीनाबाद वार्ड सबसे अधिक आमदनी वाला क्षेत्र है। इसके चलते यहां वेंडिंग माफिया भी बहुत हैं। पुलिस की मिलीभगत से इनकी दबंगई चलती है। इनकी मर्जी पर ही दुकानें लगती हैं। यही कारण है गत 11 जून को पंजीकरण बंद होने के बाद फॉर्म जमा करने को लेकर कुछ दबंगों ने भीड़ के साथ नगर निगम में बवाल काटा था। इसमें एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।
हाईकोर्ट की सख्ती पर शुरू हुआ वेंडिंग जोन का काम
पटरी दुकानदारों के हितों को लेकर केंद्र में पूर्व की कांग्रेस सरकार में ही पथ विक्रेता अधिनियम 2014 बन गया था। इसे लागू करने के लिए प्रदेश उत्तर प्रदेश पथ विक्रेता नियमावली 2016 बनी, लेकिन उसके तहत पटरी दुकानदारों को व्यवस्थित नहीं किया गया। इस पर दो माह पहले हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई तो वेंडिंग जोन बनाकर पटरी दुकानदारों को व्यवस्थित करने का काम शुरू हुआ है।
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कई आवेदन जांच में फर्जी मिले
कर अधीक्षक नगर निगम, राजेश सिंह ने बताया कि वेंडिंग प्रमाणपत्र के लिए आए कई आवेदन जांच में फर्जी मिले हैं। जिन लोगों ने पटरी दुकानदार बनकर आवेदन किया, वह मौके पर नहीं मिले। नियम के तहत उनको ही वेंडिंग जोन में समायोजन का प्रमाणपत्र दिया जाना है जो सच में पटरी दुकानदार हैं।
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